आखिर क्यों कुछ आईटी कंपनीज एम्प्लाइजस को हायर करने के बाद भी 3 सालों तक उन्हें कंपनी जॉइन ही नहीं करने दे रहे हैं, सैलरी भी नहीं दे रहे हैं। अगर आप लोग भी ये सोचते हैं आईटी की जॉब बहुत ग्लैमरस है, बहुत पैसा है चमक-धमक तो ये वीडियो आपके लिए है। पास्ट कपल ऑफ़ डेज दीज़ पिक्चर्स हैव बीन गोइंग वायरल। शोइंग 100्स ऑफ़ Infosys ट्रेनीज़ स्क्रैबलिंग टू फाइंड ट्रांसपोर्ट टू हेड बैक टू देयर होमटाउंस। दीज़ आर यंग एम्प्लाइज़ हुवर सेंट ऑफर लेटर्स बैक इन 2022 बट वर नॉट ऑन बोर्डेड अंटिल लेट 2024। अप्रैल 2022 में कार्तिक कुमार जबलपुर के एक टॉप टेक कॉलेज से ग्रेजुएट हुआ। Infosys ने उसे कैंपस प्लेसमेंट में ही हायर करके ऑफर लेटर भी दे दिया। कार्तिक खुश था। सोच रहा था कि 5 लाख का एजुकेशन लोन अब वो आराम से चुका देगा। लेकिन आज 3 साल बाद भी कार्तिक सिर्फ दो ही ईएमआई भर पाया है क्योंकि हायर होने के बावजूद Infosys ने उसे आज तक जॉइ ही नहीं करवाया है। कंपनी के रिकॉर्ड्स में कार्तिक अभी भी ऑनबोर्डिंग बेंच पे है यानी उसे जॉब मिल तो गई है पर सैलरी नहीं और जॉइनिंग कब होगी इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। मतलब बेसिकली कार्तिक के पास नौकरी होते हुए भी वो अनइंप्लॉयड है। एक दूसरे आईटी एंप्लई ने रेडिट पर पोस्ट किया कि आज ही मुझे हक मिला है और मेरी सैलरी पूरे 1% से बढ़ गई है। उसने लिखा कि उसके पास 3 साल का एक्सपीरियंस है। उसने हर दिन 121 घंटे काम किया है। अपने वीकेंड्स भी सैक्रिफाइस किए पर रिवॉर्ड मिला सिर्फ 1% ह। एंड द सैडेस्ट पार्ट इज कि यह कोई इकलौता केस नहीं है। इसी पोस्ट के नीचे के कमेंट्स पढ़ोगे तो आपको लगेगाकि एक से 5% का हक्स आईटी इंडस्ट्री में एक नॉर्म बनते जा रहा है। प्रमोशन के टाइम पर आपके साथ खिलवाड़ किया जाता है। ये नहीं देखा जाता कि आप कितने डिर्विंग हो और यहां आना चाहते हैं लोग। अपना करियर बना रहे हैं। अपनी लाइफ सेटल कर रहे हैं। अपने मां-बाप को आराम सुख चैन देने। यह मेरा शायद अब तक का सबसेकंट्रोवर्शियल वीडियो होने वाला है। इस पर मैंने एक भी नाम नहीं छुपाया है। आईटी के कई टॉप फर्म्स का नाम ओपनली लिया है। एंड इसीलिए यह एक बड़ा रिस्क है। मार्केट में पैसा था। लोगों ने भरभर के स्विच करा 10 लाख वाले 25 लाख पे पहुंच गए। 20 लाख वाले 40 लाख पे पहुंच गए। आजके टाइम में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। इफ यू आर रियली पैशनेट अबाउट इट देन ओनली डू इट। अदरवाइज डोंट डू इट। मोस्ट प्रोबेबली आर गोना गिव अप। आई नो नारायण मूर्ति कंजूस है। लेकिन इतना हो सकता है यह वीडियो डिलीट भी हो जाए। इसीलिए प्लीज इसे जितना हो सके शेयर करो ताकि इंडिया के लाखों कॉर्पोरेटएम्प्लाइजस की आवाज दबे ना। क्योंकि अब बात सिर्फ बर्नआउट्स या फिर अनफेयर हक्स की नहीं है। अब यह जिंदगी और मौत का सवाल बन चुका है। किसी 25 साल के लड़के ने लिखा उसको एक-ए महीने तक जब उसके फादर आईसीयू में भर्ती थे, तड़प रहे थे और उसको छुट्टी नहीं मिली। जिंदगी गवा दी उसके फादर ने।बेंगलुरु के एक आईटी एंप्लई ने लिखा कि मुझे लगता है मैं जल्द ही मरने वाला हूं। क्यों? क्योंकि वो पिछले 2ाई साल से रोज 14 से 16 घंटे काम कर रहा था। रात को 2:00 बजे सोने के बावजूद उसे कैसे भी करके सुबह 9:00 बजे ऑफिस पहुंचना होता था। टाइम्स ऑफ इंडिया को एक और एक एंप्लई ने बताया किउनके इंडियन आईटी स्टार्टअप के टॉक्सिक वर्क कल्चर, लेटा नाइट शिप्स और कॉन्स्टेंट प्रेशर की वजह से उन्हें एक सीवियर हार्ट अटैक आ गया। बट फॉर्चूनेटली उनकी जान बच गई। मगर नागपुर के एक आईटी प्रोफेशनल का नसीब इतना अच्छा नहीं था। 29 सितंबर को एचसीएल के एक एंप्लई को ऑफिस केवाशरूम में ही हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई। एंड हां जितने भी केसेस डाटा स्टैट्स मैं इस वीडियो में कवर करूंगी उन सबके प्रॉपर सोर्सेस फ्रॉम क्रेडिबल मीडिया आउटलेट्स मैंने नीचे डिस्क्रिप्शन में लिंक कर दिया है। यू मस्ट गो थ्रू देम। नेक्स्ट लेऑफ्स के बारे में तो हम सबजानते हैं। अभी इसी महीने टीसीएस ने उनकी 2% वर्क फोर्स यानी 12,000 एंप्लाइजस को फायर किया है। कंपनी ने हमें बिना नोटिस दिए यहां पे हमें कंपनी से बाहर निकाल दिया है। अगर वो ओवरटाइम पे जबरन रोका जाता है अगर वो मना कर देता है तो उसको निकाल देते हैं। पिछले दो सालों में इंडिया के बिग फोरTCS, Infosys, Wipro एंड कॉग्निजेंट ने ऑलमोस्ट 40 से 42,000 एंप्लाइजस को फायर कर दिया। एंड द लिस्ट गोज ऑन एंड ऑन। जब भी उनसे कोई गलती होती तो उनको वार्निंग लेटर दे दिया जाता और उनको फायर कर दिया जाता था बिना किसी रीजंस के। बट यार एक वक्त था जब आईटी सबका ड्रीम जॉब था। गवर्नमेंट सर्विज की ही तरह आईटीप्रोफेशनल्स को 50 से 60% से भी ज्यादा हक्स ईजीली मिल जाते थे। कईयों को तो कंपनीज़ 100% हक्स में एनरोल करती थी। इंडियन आईटी सेक्टर की शुरुआत 1999 के वाई2 के क्राइसिस से हुई कि जब दुनिया एक पैनिकिक स्टेट में आ गई थी और इंडियन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स ने ग्लोबल इकॉनमी कोएक तरीके से क्रैश होने से बचा लिया था। इसके बाद Infosys, TCS, विp्रो जैसे जाइंट्स ने हजारों इंजीनियर्स यूएस भेजे और वहीं से शुरू हुई इंडिया की ग्लोबल आईटी स्टेज पर एंट्री। मिड 200 में तो आईटी ने इंडिया के जीडीपी में एक मेजर चंक 5.8% कंट्रीब्यूट करना भी शुरू कर दियाथा। और हमारे देश को कई हीरे मिल गए जैसे नारायणणा मूर्ति जिन्होंने वाइफ से ₹10,000 उधार लेके Infosys स्टार्ट किया और आज उनकी कंपनी करोड़ों में कमाती है। शिवनादर जिन्होंने एक तमिलनाडु के गांव से निकल के एचसीएल जैसा एंपायर बनाया। फिर जय चौधरी जो पेड़ के नीचे पड़े और आज एक 30बिलियन डॉलर की आईटी फर्म के मालिक हैं। यह सारे टेकीस बहुत ही हम्ल बैकग्राउंड से आए थे। मगर कुछ ही सालों में यह भारत की शान बन गए। इसीलिए इसके बाद हर एक मिडिल क्लास मां-बाप का एक ही सपना बन गया। मेरा बच्चा आईटी में जाएगा और शुरू हो गया आईटी इंडस्ट्री में टैलेंट का हैवी सप्लाई। आजहालात यह है कि कुछ मां-बाप अपने बच्चों को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाने के लिए अपनी किडनी तक बेचने को तैयार है। मेरे बच्चा पढ़ रहा है। जब मेरा बेटा बोल रहा है कि मेरे को साइंस लेकर पढ़ना था। मैं सोच रहा हूं कैसे साइंस लेकर पढ़ाऊंगा। मेरे पास तो कुछ इनकम भी है नहीं मेरे पास। मैं अपनी किडनी बेचकर बेटेको पढ़ाऊं। इतनी बड़ी कुर्बानी सिर्फ इस उम्मीद में कि आईटी सेक्टर में उनके बच्चे का फ्यूचर सिक्यर्ड रहेगा। अनलाइक ए्री प्रोफेशन नॉट एवरीथिंग इज बैड हियर। इनफैक्ट ऐसे भी केसेस हैं जिसमें आईटी ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। कार्तिक जिसका 2015 में 4.4 लाख सीटीसी से करियर शुरूहुआ वो आज 2025 में 1 करोड़ कमा रहा है। भोपाल का एक उबर ड्राइवर कोडिंग का एक कोर्स करके आईटी सेक्टर में घुस गया और अब अच्छी सैलरी कमा रहा है। मैं जब कस्टमर को पिक करने के लिए एयरपोर्ट पे जाता था और कस्टमर आकर के गाड़ी में बैठते थे तो मेरे को यह फील आता था कि एक दिन ऐसा जरूर आएगाकि मैं एयरपोर्ट से निकलूूंगा, कैब बुक करूंगा और गाड़ी में आकर के ऐसे बैठूंगा। बट सवाल यह है कि क्या आईटी सेक्टर अब भी वो एक ड्रीम फैक्ट्री है जहां मिडिल क्लास का सपना सच होता है या जो डार्क स्टोरीज हमने शुरू में देखी वो सिर्फ कुछ रेयर केसेस नहीं बल्कि एक सिस्टमैटिक टॉक्सिककल्चर का हिस्सा है जो अब जाके धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रहा है सोशल मीडिया की वजह से। आईटी इंडस्ट्री की हारश रियलिटी समझने से पहले आज के कॉर्पोरेट वर्ल्ड में सक्सेस पाने का एक सबसे बड़ा विलेन बन चुका है पुअर कम्युनिकेशन। आईटी, मार्केटिंग, फाइनेंस या एचआर चाहे आप किसीभी इंडस्ट्री में हो, आपके टेक्निकल स्किल्स से ज्यादा मायने रखते हैं आपके कम्युनिकेशन स्किल्स। क्योंकि इट्स लिटरली योर फर्स्ट इंप्रेशन। लेकिन अब सोचो आपने एक इंपॉर्टेंट क्लाइंट को या अपने बॉस को एक मेल भेजा और यह लिख दिया। रेस्पेक्टेड सर, आई एम राइटिंग दिस मेल टू इन्फॉर्म यूदैट माइसेल्फ विल नॉट बी अवेलेबल टुमारो। ऐसा सिर्फ एक ही मेल काफी है आपको एकदम अनप्रोफेशनल और नॉन सीरियस दिखाने के लिए। बट शॉकिंगली एक सर्वे के हिसाब से 62% इंडियंस एडमिट करते हैं कि उनसे प्रोफेशनल ईमेल्स में ग्रामेटिकल एरर्स अक्सर होते हैं। बट नॉट एनी मोर क्योंकि अब क्वल बॉटइसमें आपका एक सीक्रेट वेपन बन सकता है। क्विलबॉट एक एआई राइटिंग टूल है जो आपके गलत ग्रामर वीक बोरिंग सेंटेंसेस या इवन रॉन्ग टोन को स्मार्टली आइडेंटिफाई करके एकदम प्रोफेशनल बना देता है। जैसे हमारे गलत सेंटेंस को ही देख लो। क्वल बॉट ने कितना पॉलिश्ड और इंपैक्टफुल बना दिया।कुछ इसी तरह आप बड़े-बड़े पैराग्राफ्स को भी क्वलबॉट की मदद से विद इन सेकंड्स एकदम परफेक्ट बना सकते हो। एंड अपने हिसाब से अपनी राइटिंग का टोन भी सेट कर सकते हो। जैसे फॉर्मल, क्रिएटिव या फिर फ्लूएंट। इसका सबसे बेस्ट पार्ट आपको अलग से कुछ कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस करना नहीं पड़ता।क्वलbot Chrome एक्सटेंशन इंस्टॉल करो और बस Google DX Gmail या इवन Powpin प्रेजेंटेशंस में लिखते वक्त जैसे ही आप टेक्स्ट सेलेक्ट करके क्वलbot का ऑप्शन सेलेक्ट करोगे तुरंत आपको एक रिफाइंड और एरर फ्री वर्जन मिल जाता है। यानी अब से आपके प्रमोशंस या फिर क्लाइंट डील्स सिर्फवीक इंग्लिश की वजह से नजरअंदाज नहीं होंगे। तो सिर्फ एक मेल क्विलब से लिख के देखो। यू विल डेफिनेटली सी अ मेजर डिफरेंस। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। आप जाके ट्राई कर सकते हो। नाउ लेट्स कम बैक टू आवर टॉपिक। तो सबसे पहले यह बात समझो कि इंडियन आईटी इंडस्ट्री में दो टाइप्सके कंपनीज होती है। प्रोडक्ट बेस्ड कंपनीज़ जिनके खुद के प्रोडक्ट्स होते हैं जैसे कि Google, Amazon, Flipkart। लेकिन यह सिर्फ टॉप स्किल डेवलपर्स को ही हायर करते हैं। अब इंडिया की प्रॉब्लम यह है कि सिर्फ 2.68% फ्रेश इंजीनियर्स ही इस स्किल सेट को मैच कर पाते हैं। इसीलिए मेजॉरिटीइंजीनियर्स दूसरे टाइप ऑफ कंपनीज़ में ज्वॉइ करते हैं जो होती है सर्विस बेस्ड कंपनीज़ जैसे TCS, Infosys, WPRO वगैरह जो दूसरे ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए आईटी सर्विज प्रोवाइड करते हैं। इंडिया में 54 लाख से भी ज्यादा लोग इन्हीं सर्विस बेस्ड कंपनीज़ में काम कर रहे हैं। और एक्चुअलीइन्हीं कंपनीज़ की दुनिया भर में डिमांड भी काफी हाई है। क्योंकि इंडिया इन एमएसीस के लिए एक चीप लेबर हब है। एग्जांपल के लिए एक इंडियन आईटी एंप्लई को हायर करने के लिए एक अमेरिकन के कंपैरिजन में 70% सस्ता पड़ता है। सोचो कितना बड़ा प्रॉफिट मार्जिन है। बट एक आईटी ग्रेजुएट के लिएरियल स्ट्रगल तब शुरू होता है जब डिग्री के साथ उसे कॉलेज प्लेसमेंट तो मिल जाता है लेकिन फिर भी उसे अनइंप्लॉयड बनके रहना पड़ता है। ग्रेजुएट्स एंड पोस्ट ग्रेजुएट्स आर अनइंप्लॉयड रेडी टू वर्क फॉर ���ज लेस इज ₹4000 पर मंथ। मैंने बीटेक किया हुआ है वो भी कंप्यूटर साइंस से ही। कॉलेज प्लेसमेंट मिली थी।एमएनसी का एक्सपीरियंस हो चुका है मुझे 2.5 साल का। लगभग मैंने 100 प्लस या 150 प्लस कंपनीज़ में अप्लाई किया होगा। बट मुझे अभी तक एक भी कॉल नहीं आया है। महाराष्ट्र की सोनल जिसे कार्तिक कुमार की ही तरह डिग्री हाथ में आने से पहले ही प्लेसमेंट मिल गई थी। लेकिन 2 साल से वोInfosys के जॉइ लेटर का इंतजार ही कर रही है। बैंक वाले उसके घर तक पहुंच गए हैं। वो ऑफर लेटर दिखा के जैसे तैसे उन्हें टाल रही है। मगर ऐसा चलेगा कब तक? आज इंडिया के आईटी सेक्टर में कई फ्रेशर्स को ऑफर लेटर मिलने के बाद भी दो से तीन साल तक वेट करना पड़ रहा है। इसे आईटी इंडस्ट्रीमें ऑनबोर्डिंग बेंचिंग कहते हैं जो इसीलिए होता है क्योंकि यह सर्विस बेस्ड कंपनीज़ अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के एस्टीमेट्स पे ही हायरिंग करती है। सो अगर कल को प्रोजेक्ट डिले हुआ तो वो एंप्लाइजस का जॉइनिंग डेट भी डिले हो जाता है। एंड कई बार सालों तक। बट फाइनली जब एक फ्रेशर कोजॉब मिलती है, जानते हो इंडिया में उनकी एवरेज सैलरी कितनी है? 3 टू 5 लै पर एनम। पिछले 10 सालों में Infosys, TCS, विp्रो ने फ्रेशर्स की सैलरी 3 लाख के आसपास ही फ्रीज करके रखी हुई है। जो कि कई कॉलेजेस की 15 लाख की एडमिशन फीस के सामने कुछ भी नहीं है। आज की जॉब मार्केट में सबके लगे पड़े हैं।वो पुराने दिन चले गए जब मार्केट में पैसा था। लोगों ने भरभर के स्विच करा। 10 लाख वाले, 25 लाख पे पहुंच गए, 20 लाख, वाले, 40 लाख पे पहुंच गए। आज के टाइम में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। एस्पेशली यू आर अ फ्रेशर हु ट्राइंग टू लुक फॉर अ जॉब, योर कुक् अब एक बार जॉइनिंग कर लिया। इसके बाद शुरूहो जाता है स्ट्रगल ऑफ ओवरवर्क। कई कंपनीज में रोज के 14 से 16 घंटे काम करना एकदम नॉर्मल है। एक बेंगलुरु के आईटी एंप्लई ने बताया वो पिछले 2ाई साल से हर दिन 14 से 16 घंटे काम करने के बाद भी रात को 2:00 बजे सोता है। लेकिन इसके बाद भी उसे सुबह 9:00 बजे तक ऑफिस पहुंच जाना पड़ता है। औरहां, रात में भी नींद मिलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इट्स ओवर 12। मेरा बेटा यहां सो चुका है। अपने डैडी का वेट करते-करते किचन में खाना बना रखा है? क्योंकि मेरे हस्बैंड को खाने का टाइम नहीं मिला। क्या करूं? मेरे को समझ में नहीं आ रहा। आप बोल रहे हो मैं कर रहा हूं। मेरे को पता भी नहीं हम क्या करसुबह से अभी तक एंड आई डोंट नो कब तक चलने वाला है। एक दूसरे एंप्लॉय ने लिखा कि उसने चार दिन तक रात भर जाग कर एक फाइनेंस प्रोग्राम मॉनिटर किया। वो पूरे दिन में सिर्फ 4 घंटे ही सो पाता था और उसके शब्दों में यह प्योर टॉर्चर था। दूसरे आईटी सपोर्ट इंजीनियर को रात 1:30 बजेमैसेज आता है कि सुबह 6:00 बजे उसे शिफ्ट जॉइ करनी है। जबकि वो ऑलरेडी एक रात पहले देर रात तक काम कर चुका था। अब ओवरवर्क के बाद भी अगर फ्यूचर में आप लीडरशिप रोल्स चाहते हो तो इसके लिए अपना काम पूरा करके आपको एक्स्ट्रा रुकना पड़ता है। एक सीनियर डेवलपर ने बताया कि उसे हर हफ्ते ऑफिस केकाम के बाद 20 घंटे की कंपलसरी अनपेड लर्निंग करनी पड़ती है। सिर्फ इसीलिए ताकि वो लीडरशिप रोल के लिए क्वालिफाई हो जाए और इस वजह से अब उसे ए्जायटी और चेस्ट पेन होने लगा है। एंड ये सिर्फ इंडिविजुअल स्ट्रगल्स नहीं है। मै लेवल पे भी डाटा उतना ही डरावना है। इंडिया टुडे मेंपब्लिश्ड एक सर्वे में 1450 इंडियन आईटी प्रोफेशनल्स ने बताया 72% लोग हर हफ्ते लीगल 48 आवर्स शिफ्ट से भी ज्यादा काम करते हैं। 25% एंप्लाइजस तो हर हफ्ते 70 आवर्स से भी ज्यादा काम करते हैं। 83% टेकीस बर्न आउट फील कर रहे हैं और 68% पे आफ्टर ऑफिस भी ऑनलाइन रहने का प्रेशर होताहै। इसीलिए 2025 के अंत तक लगभग 22 लाख आईटी एम्प्लाइजस इस बर्न आउट की वजह से जॉब छोड़ने की प्लानिंग क�� रहे हैं। अब आई नो आप यही सोच रहे होंगे कि ऐसे में वो एचआर से कंप्लेन क्यों नहीं करते? बट इसका नतीजा क्या होता है जानते हो? एचआर आपसे मीटिंग लेके एक रिटन एपोलॉजी साइन करनेबोलता है क्योंकि आपने अपनी एक हारश रियलिटी सच्चाई सबके सामने रखने की हिम्मत की। एटलीस्ट कई फोरम्स पे आईटी एंप्लाइजस ने यही लिखा है। बट आप लोग के अपने-अपने कंपनीज़ के एचआर्स के बारे में क्या ओपिनियंस है? आप नीचे कमेंट सेक्शन में शेयर कर सकते हो। लेकिन चलो इतनी मेहनतकरने के बाद भी एक इंसान सोचेगा कि अब नहीं तो आगे जाके अच्छी सैलरी मिलेगी। बट यह है इंडियन आईटी सेक्टर की टॉप कंपनीज़ का हक स्ट्रक्चर। 2022 से इन कंपनीज़ का हक परसेंटेज गिरता ही जा रहा है। सैलरी हक् जैसे ऑलमोस्ट पॉज हो चुकी है। इस साल तो कंपनीज़ ऑन एन एवरेज सिर्फ 4 से 7% की हीहक् दे रही है। बट ये सिंगल डिजिट हक्स भी ऐसे ही आसानी से नहीं मिलती है। कई कंपनीज़ जैसे कि एलटीआई माइंड ट्री के प्रोजेक्ट लीड्स, मैनेजर्स और आर्किटेक्ट्स को हक मिलने के लिए कोडिंग और मैथ्स के कॉम्पिटेंट टेस्ट देने पड़ते हैं। फिर चाहे उनका पिछला टर्म या फिर साल का प्रैक्टिकलऑन ग्राउंड परफॉर्मेंस कितना भी अच्छा क्यों ना हो लेकिन उनका हक डिपेंड करेगा उनके इस टेस्ट के परफॉर्मेंस पे। TCS ने तो ये चार क्राइटेरिया रखा है जिन्हें एम्प्लाइजस को पूरा करना ही पड़ता है। कुछ रिपोर्ट्स के हिसाब से विp्रो में मोस्टली सिर्फ टॉप परफॉर्मर्स को ही हक्स मिलती हैऔर एचसीएल में ऐसी कोई कंडीशन मुझे नहीं मिली। लेकिन यहां के एंप्लाइजस को ऑन एन एवरेज ह वन या 5% ही मिलता है। कई टेक जंट्स के एम्प्लाइजस का यह भी कहना है कि चाहे हमारी परफॉर्मेंस रेटिंग कितनी भी पॉजिटिव हो फिर भी हक हमारा डिले होता ही है और कभी मिला भी तो सिर्फ दो-3000 का ही हक मिलता है।TCS, Infosys और बाकी जो भी कंपनीज़ है पिछले कई सालों से उन्होंने बहुत ज्यादा ऐसा कुछ सैलरी हक दिया नहीं है। Infosys में क्या हक हो रहा है? चार साल में 11% बढ़े हैं। पूरे चार साल में मिलाके। किसी साल मिले ही नहीं है। किसी साल 4%, किसी साल 3%. व्हाट्स द स्टार्टिंग सैलरी नाउ फॉर फ्रेशर्स?इटज़ बीन देअर द सेम सैलरी व्हाट वी हैव बीन गिविंग फॉर लास्ट सो मेनी इयर्स। व्हाई इज इट दैट फ्रेशर सैलरीज फॉर इंजीनियर्स नॉट गॉन अप इन द लास्ट सो मेनी इयर्स। 2024 के डाटा के मुताबिक सिर्फ 11.5% एम्प्लाइजस को प्रमोशन मिला। यानी 100 में से बस 11 लोगों को। विp्रो का यह एग्जांपलले लो। पिछले पूरे साल में सिर्फ 31 एंप्लाइजस को ही प्रमोशन मिली थी। बट ऑन द कॉन्ट्ररी बिज़नेस टुडे के हिसाब से पिछले 10 साल में Infosys WPRO और TCS के सीईओस की सैलरी 15500% से बड़ी है। लेकिन फ्रेशर्स की सिर्फ 50% फ्रेशर्स होते हैं उनकी सैलरी तीन या 4 लाख के आसपास ही रहती है। और जो सीईओसी हैउनकी लाखों करोड़ों में सैलरीज है। अब सैलरीज के अलावा इस इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है जॉब सेफ्टी। आईटी इंडस्ट्री में एक बड़ा सीक्रेट है जो जानते तो सब है मगर कोई खुल के एक्सेप्ट नहीं करता है। इसका नाम है द 404 सिंड्रोम। एक टॉप कंपनी के सीईओ शांतनु देश पांडे ने एक बहुत इंपॉर्टेंट बात कही।जो लोग अपने 40ज में होते हैं उनके ऊपर सबसे ज्यादा फाइनेंसियल बर्डन होता है। बच्चों की स्कूलिंग, पेरेंट्स की हेल्थ केयर और घर के एमाइस। लेकिन अनफॉर्चूनेटली अभी इसी एज ग्रुप के लोग आईटी में सबसे ज्यादा वनरेबल हो गए हैं टू ले ऑफ्स। कोरा रेडिट और बाकी कई जॉब फोरम्स ऐसे कमेंट सेभरे हुए हैं जिसमें लोगों ने लिखा है कि 40 के बाद तो आईटी में फ्यूचर ही नहीं है। उन्हें अपने ऑफिस में कोई 40 के ऊपर का एंप्लई ज्यादा दिखता ही नहीं है और डाटा भी इसी बात को सपोर्ट करता है। एनालिटिक्स इंडिया मैगजीन के सर्वे के हिसाब से Infosys और TCS जैसे टॉप फर्म्स के 50%एंप्लाइजस 20 से 35 इयर्स के एज ग्रुप में हैं। 40% लोग 35 से 50 के एज ग्रुप में है और सिर्फ 10% लोग ही 50 के ऊपर वाले हैं। यह डाटा दिखा रहा है कि आईटी सेक्टर में शायद अब रिटायरमेंट का एज 58 नहीं है बट 40ज और अर्ली 50ज में है। Infosys के खिलाफ तो यूएस में एज डिस्क्रिमिनेशन काकेस भी फाइल हो चुका है क्योंकि वो एजेड कैंडिडेट्स को हायर नहीं करते हैं। इसके पीछे परसेप्शन यह है कि ओल्डर एंप्लाइज स्लो अडप्ट करते हैं नए टूल्स और टेक्स्ट सीखने में और टाइम लगाते हैं बट उनका पैकेज काफी हाई होता है। जैसे-जैसे उनकी सन्योरिटी बढ़ती जाती है, वो 40 लै से ऊपरका पैकेज एक्सपेक्ट करते हैं। जो आईटी कंपनीज के लिए काफी बड़ा ओवरहेड कॉस्ट होता है और इसीलिए द प्रिंट ने इसे द 40-4 सिंड्रोम नाम दिया है। और अब तो मार्केट में एआई आ गया है। पहले तो लोगों को लगता था कि अगर जॉब चली गई है तो शायद परफॉर्मेंस खराब होगा या एज फैक्टर होगा।लेकिन अब तो कंपनीज़ ओपनली कह रही है कि हम एआई की वजह से लोगों को रिप्लेस कर रहे हैं। रिसेंटली Microsoft ने अपनी 2% वर्क फोर्स को फायर कर दिया। अराउंड 50,000 लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए। रीजन क्योंकि कंपनी को एi टेक में ट्रांजिशन करना है। इतना ही नहीं Microsoft ने एआई डिवीजन केडायरेक्टर को भी तक निकाल दिया। Microsoft अनाउंस्ड अनदर राउंड ऑफ़ मैसिव लेऑफ। द टेक कंपनी इज लेइंग ऑफ अबाउट 9000 एम्प्लाइज। Microsoft इज नॉट अलोन। Google, Amazon, मेटा दे हैव ऑल गॉन थ्रू राउंड्स ऑफ़ लेऑफ्स। वन रीज़न कीप्स शोइंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। 60% ऑफ़ ऑल जॉब्स चेंज्ड बिटवीन 1940 एंडटुडे। आई डु बिलीव दैट एआई इज गोइंग टू रिप्लेस अ लॉट ऑफ़ व्हाट आई ऍम कॉलिंग वाइट कॉलर क्लेरिकल जॉब्स। पर इसमें एक बात गौर करने वाली ये है कि मोस्टली सीनियर और मिड लेवल एम्प्लाइजस को फायर किया जा रहा है। ऑब्वियसली सैलरीज बचाने के लिए। फिर टीसीएस ने भी लगभग 12,000 लोगों को हटा दिया। वो भी मोस्टलीमिड और सीनियर लेवल एंप्लाइजस ही थे। कंपनी ने रीज़न दिया कि उन सबका स्किल सेट मैच नहीं करता। सो शायद यहां भी वो एआई लेड प्रोजेक्ट्स के लिए स्किल्स की बात कर रहे थे। मतलब इन आईटी कंपनीज़ में जो लोग नए टूल्स और टेक के साथ अपस्किल नहीं हो पा रहे हैं उन्हें सबसे पहले टारगेट कियाजा रहा है। अब देखो कंपनीज़ एआई के नाम पे मोस्टली दो तरह की जॉब्स हटा रही है। सबसे पहला तो मिड लेवल मैनेजर्स का। क्योंकि पहले मैनेजर्स के तीन मेजर काम होते थे। फर्स्ट कोऑर्डिनेशन का काम जैसे टास्क असाइन करना, डेडलाइंस को ट्रैक करना वगैरह। लेकिन आज आसना, ट्रेलो, mi.comजैसे एi टूल्स ये सब काम रियल टाइम में कर रहे हैं। वो भी बिना ह्यूमन एरर के। दूसरा रिपोर्टिंग वाला काम। पहले मैनेजर रिपोर्ट्स बनाते थे और डाटा एनालाइज करते थे। लेकिन आज पावर, बीआई, टैबलो जैसे टूल्स खुद से डाटा एनालाइज करके डैशबोर्ड्स बनाते हैं। इंसाइट्स निकालते हैं वो भी चुटकियों में। तीसरा डिसीजनमेकिंग वाले काम। डेली ऑपरेशंस और क्राइसिस सॉल्व करना मैनेजर का काम था। लेकिन अब प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और एमएल एल्गोरिदम्स मतलब कुछ स्पेशल एआई टूल्स बस प्रोजेक्ट के डिटेल्स देने पर ही पहले से बता देते हैं ट्रेंड्स एनालाइज करके कि कौन सी प्रॉब्लम आ सकती है और उसके सशंसक्या हो सकते हैं। अब मिड लेवल मैनेजर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंपैक्ट हो रहा है डेवलपर्स पे। कॉर्नर यूनिवर्सिटी के एक एक्सपेरिमेंट में एक डेवलपर और एक एआई गेट हब को पायलट के बीच में कोडिंग स्पीड की रेस हुई एंड द रिजल्ट्स विल ब्लो योर माइंड। कोपायलट ने ह्यूमन से 55.8%फास्ट कोड लिखा। यानी अब एक डेवलपर की जगह आधे से भी कम टाइम में एi वही काम कर रहा है। सत्यनंदला ने खुद कहा है कि Microsoft की 30% कोडिंग आज एi टूल्स से होती है और आयरनी यह है कि Microsoft ने उन डेवलपर्स को भी निकाल दिया है जिन्होंने एi टूल्स बनाने में मदद की थी। और एi की कॉस्टएफिशिएंसी तो कंपनीज के लिए एक जैकपॉट बन चुकी है। एक ग्लोबल थिंक टैंक मीटर ने टेस्ट करके बताया कि एi सिर्फ $2 या उससे कम कॉस्ट में भी बग्स फिक्स कर सकता है वो भी मिटो में। सो मैथ्स यहां यह है कि जब एक काम $2 में हो सकता है तो एक कंपनी $ लाख पर मंथ क्यों देगी? एंड एआई के अलावाएक और एक चीज है जो आईटी एम्प्लाइजस को कास्टेंटली आउटपेस कर रही है। तेज रफ्तार से बदलती प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। देखो आईटी सेक्टर में कोई भी ऐप या वेबसाइट बनाने के लिए डेवलपर्स अलग-अलग कोडिंग लैंग्वेज यूज करते हैं। जैसे जावा, Python, Swift वगैरह। लेकिन प्रॉब्लम यहहै कि ये लैंग्वेजेज़ अब हर कुछ सालों में ही ऑब्सोलेट हो जा रही हैं। 2017 के पहले Android एप्स मोस्टली जावा में बनती थी। लेकिन आज कॉटलिंग लैंग्वेज ने उसे रिप्लेस कर दिया है। मेटा, ओलx, Amazon जैसे जॉइंट्स ने अपना पूरा कोड कॉटलिन में ही रीाइट कर दिया है। Apple ने भी 2014 केबाद ऑब्जेक्टिव सी लैंग्वेज को ऑलमोस्ट रिटायर करके Swift को मैंडेटरी कर दिया। वेब डेवलपमेंट में भी पहले पर्ल यूज़ होती थी। अब Python, जावास्क्रिप्ट और रस्ट डिमांड में है। बेसिकली हर दो-तीन सालों में नए फ्रेमवर्क्स और लैंग्वेजेस आ जाते हैं। इतनी स्पीड से नए लैंग्वेज अपडेट होरहे हैं कि कई मिड लेवल डेवलपर्स को एडप्ट करने के टाइम मिले बिना ही उनका स्किल सेट इररेिलेवेंट होते जा रहा है। व्हेन यू लर्न अ कंसेप्ट ऑफ अ कोडिंग लैंग्वेज, लाइब्रेरी और एपीआई, देयर इज ऑलवेज पॉसिबिलिटी दैट इट विल बिकम ओल्ड एंड ऑब्सोल्यूट इन नेक्स्ट फ्यू इयर्स। और इन सबके अलावा एक और एक बड़ा फैक्टर हैसरकारी पॉलिसीज। 2020 के बाद से गवर्नमेंट ने कई आईटी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन यानी कि सेल्स के टैक्स बेनिफिट्स हटा दिए और वर्क फ्रॉम होम के लिए नए स्ट्रिक्ट रूल्स ला दिए। अब कंपनीज़ को फुल टैक्स देना पड़ता है और रिमोट वर्क के बावजूद 50% स्टाफ को ऑफिस बुलाना पड़ता है। अगेन एक और एक बेनिफिट जोपहले आईटी एम्प्लाइजस को मिलता था। अब धीरे-धीरे वो भी घटता जा रहा है। कंपनीज़ ने पहले वन डे वर्क फ्रॉम ऑफिस से स्टार्ट किया। लेकिन अब धीरे-धीरे टू थ्री से वो कंप्लीटली वर्क फ्रॉम ऑफिस कल्चर में शिफ्ट होने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अब इसका अंजाम यह हो रहा है कि कंपनीज़ के लिएकॉस्ट बढ़ रही है बट प्रॉफिट्स घट रहे हैं। सो इसका सशन बन रहा है मास फायरिंग। सो ये थे सभी रीज़ंस बिहाइंड स्ट्रेसफुल एंड टॉक्सिक वर्क कल्चर एंड आईटी। बट मुझे पर्सनली इस सेक्टर की सबसे बड़ी एंड कोर प्रॉब्लम पता है क्या लग रही है? डिमांड से कहीं ज्यादा लेवल का सप्लाई। आपने ऐसीन्यूज़ सुनी होगी। पुणे में 100 जॉब्स के लिए 3000 इंजीनियर्स लाइन में खड़े हैं। गुजरात में सिर्फ 10 वैकेंसीज के लिए 1000 लोग इंटरव्यू देने आ गए हैं। इंडस्ट्री की सिचुएशन इतनी खराब है कि पिछले साल 15 लाख इंजीनियर्स ग्रेजुएट हुए लेकिन सिर्फ 70,000 फ्रेशर्स को ही जॉब मिली। मतलब जितनी वैकेंसीज भी नहीं हैउससे भी ज्यादा लोग हजारों लोग काम के लिए रेडी बैठे हैं। इसका फायदा जाहिर है कंपनीज उठा रही है। वो एम्प्लाइजस को चाहे जैसे भी ट्रीट करें एंप्लाइज उसे चुपचाप सह लेते हैं। क्योंकि दोनों जानते हैं कि बाहर हजारों लोग उन्हें रिप्लेस करने के लिए बस इंतजार कर रहे हैं। नाउ द क्वेश्चनइज हाउ टू एस्केप दिस लूप? क्या इसका मतलब यह है कि आईटी सेक्टर बिल्कुल खत्म हो चुका है। किसी को उसे जॉइ नहीं करना चाहिए? बिल्कुल नहीं। मैं कई लोगों को जानती हूं जो आईटी में है एंड हु आर हैप्पी विद देयर सैलरी एंड कंपनसेशन। लेकिन हां वर्क कल्चर और टाइमिंग्स को लेकर मेरे भी फ्रेंड्स उतने खुश नहीं है।लेकिन इस वीडियो से एक बात सबको समझ जानी चाहिए कि आईटी इज नो लगर अ सेफ ज़ोन। इनफैक्ट इट हैज़ बिकम अ वॉर ज़ोन। और बैटल फील्ड में सिर्फ वही टिकता है जो कास्टेंटली खुद को अपग्रेड करता है। जैसे नारायण मूर्ति ने भी कहा था लर्न, अनलर्न एंड देन रीलर्न। दैट इज द ओनली वे टूसर्वाइव दिस इंडस्ट्री। आज भी कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने टाइम पर अपस्किल किया और ऐसे फ्यूचर प्रूफ स्किल्स सीखे जिन्होंने उन्हें इरिप्लेसेसबल बना दिया। जैसे किसी ने क्लाउड सीखा, किसी ने डाटा इंजीनियरिंग और किसी ने एआई टूल्स और आज वो या तो फॉरेन कंपनीज़ के लिए रिमोट काम कर रहे हैंया खुद का फ्रीलांसिंग क्लाइंट्स हैंडल कर रहे हैं ऑन देयर ओन टर्म्स। जैसे ये 32 साल के इंजीनियर जिन्होंने 2015 में एक टायर टू कॉलेज से इंजीनियरिंग की और एज अ सॉफ्टवेयर डेवलपर 4.4 लैक्स के पैकेज से उनकी शुरुआत हुई। लेकिन फिर 2019 में उन्होंने अपस्किल किया और उन्हें सीधा ₹17लाख का पैकेज मिल गया और आज ऐसे ही अपस्किल करते-करते वो ₹1 करोड़ कमा रहे हैं। कहने का मतलब है इंडस्ट्री टॉक्सिक हो सकती है लेकिन हर एक एंप्लॉय की कहानी वो खुद लिखता है। तो अब सवाल यह नहीं है कि आईटी इंडस्ट्री आपके साथ क्या करेगी? सवाल यह है कि आप आईटी इंडस्ट्री में बनेरहने के लिए क्या करने वाले हैं? या फिर इस पूरे लूप से ही बाहर निकलने के लिए आप क्या करने वाले हो? अगेन मेरे कुछ फ्रेंड्स हैं जिन्होंने आईटी फील्ड से बाहर निकलकर अपना खुद का स्माल स्किल बिजनेस स्टार्ट कर लिया या फिर किसी ने फील्ड ही चेंज कर लिया। बट अगेन मेरा यह वीडियो किसी को भी डराने के लिए नहीं है।यह बस एक रियलिटी चेक है कि सिर्फ आईटी इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा रफ्तार से बदल रही है। शायद पूरी हिस्ट्री में टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से कभी इवॉल्व नहीं हुई होगी। मगर परिवर्तन ही तो प्रकृति का नियम है। और इसीलिए आज का मैसेज एकदम सिंपल है। इटइज नॉट द स्ट्रांगेस्ट ऑफ द स्पीशीज दैट सर्वाइव्स नॉर द मोस्ट इंटेलिजेंट बट इट इज द वन दैट इज द मोस्ट एडप्टेबल टू चेंज। जय हिंद। एंड हां, जाने से पहले डू नॉट फॉरगेट टू चेक आउट क्वब जो आपके सारे ईमेल्स, प्रेजेंटेशंस, असाइनमेंट्स, सारी चीजों में आपके इंग्लिश ग्रामर को बहुत ज्यादाइंप्रूव कर सकता है। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन।

_ I think I आखिर क्यों कुछ आईटी कंपनीज एम्प्लाइजस को हायर करने के बाद भी 3 सालों तक उन्हें कंपनी जॉइन ही नहीं करने दे रहे हैं, सैलरी भी नहीं दे रहे हैं। अगर आप लोग भी ये सोचते हैं आईटी की जॉब बहुत ग्लैमरस है, बहुत पैसा है चमक-धमक तो ये वीडियो आपके लिए है। पास्ट कपल ऑफ़ डेज दीज़ पिक्चर्स हैव बीन गोइंग वायरल। शोइंग 100्स ऑफ़ Infosys ट्रेनीज़ स्क्रैबलिंग टू फाइंड ट्रांसपोर्ट टू हेड बैक टू देयर होमटाउंस। दीज़ आर यंग एम्प्लाइज़ हुवर सेंट ऑफर लेटर्स बैक इन 2022 बट वर नॉट ऑन बोर्डेड अंटिल लेट 2024। अप्रैल 2022 में कार्तिक कुमार जबलपुर के एक टॉप टेक कॉलेज से ग्रेजुएट हुआ। Infosys ने उसे कैंपस प्लेसमेंट में ही हायर करके ऑफर लेटर भी दे दिया। कार्तिक खुश था। सोच रहा था कि 5 लाख का एजुकेशन लोन अब वो आराम से चुका देगा। लेकिन आज 3 साल बाद भी कार्तिक सिर्फ दो ही ईएमआई भर पाया है क्योंकि हायर होने के बावजूद Infosys ने उसे आज तक जॉइ ही नहीं करवाया है। कंपनी के रिकॉर्ड्स में कार्तिक अभी भी ऑनबोर्डिंग बेंच पे है यानी उसे जॉब मिल तो गई है पर सैलरी नहीं और जॉइनिंग कब होगी इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। मतलब बेसिकली कार्तिक के पास नौकरी होते हुए भी वो अनइंप्लॉयड है। एक दूसरे आईटी एंप्लई ने रेडिट पर पोस्ट किया कि आज ही मुझे हक मिला है और मेरी सैलरी पूरे 1% से बढ़ गई है। उसने लिखा कि उसके पास 3 साल का एक्सपीरियंस है। उसने हर दिन 121 घंटे काम किया है। अपने वीकेंड्स भी सैक्रिफाइस किए पर रिवॉर्ड मिला सिर्फ 1% ह। एंड द सैडेस्ट पार्ट इज कि यह कोई इकलौता केस नहीं है। इसी पोस्ट के नीचे के कमेंट्स पढ़ोगे तो आपको लगेगाकि एक से 5% का हक्स आईटी इंडस्ट्री में एक नॉर्म बनते जा रहा है। प्रमोशन के टाइम पर आपके साथ खिलवाड़ किया जाता है। ये नहीं देखा जाता कि आप कितने डिर्विंग हो और यहां आना चाहते हैं लोग। अपना करियर बना रहे हैं। अपनी लाइफ सेटल कर रहे हैं। अपने मां-बाप को आराम सुख चैन देने। यह मेरा शायद अब तक का सबसेकंट्रोवर्शियल वीडियो होने वाला है। इस पर मैंने एक भी नाम नहीं छुपाया है। आईटी के कई टॉप फर्म्स का नाम ओपनली लिया है। एंड इसीलिए यह एक बड़ा रिस्क है। मार्केट में पैसा था। लोगों ने भरभर के स्विच करा 10 लाख वाले 25 लाख पे पहुंच गए। 20 लाख वाले 40 लाख पे पहुंच गए। आजके टाइम में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। इफ यू आर रियली पैशनेट अबाउट इट देन ओनली डू इट। अदरवाइज डोंट डू इट। मोस्ट प्रोबेबली आर गोना गिव अप। आई नो नारायण मूर्ति कंजूस है। लेकिन इतना हो सकता है यह वीडियो डिलीट भी हो जाए। इसीलिए प्लीज इसे जितना हो सके शेयर करो ताकि इंडिया के लाखों कॉर्पोरेटएम्प्लाइजस की आवाज दबे ना। क्योंकि अब बात सिर्फ बर्नआउट्स या फिर अनफेयर हक्स की नहीं है। अब यह जिंदगी और मौत का सवाल बन चुका है। किसी 25 साल के लड़के ने लिखा उसको एक-ए महीने तक जब उसके फादर आईसीयू में भर्ती थे, तड़प रहे थे और उसको छुट्टी नहीं मिली। जिंदगी गवा दी उसके फादर ने।बेंगलुरु के एक आईटी एंप्लई ने लिखा कि मुझे लगता है मैं जल्द ही मरने वाला हूं। क्यों? क्योंकि वो पिछले 2ाई साल से रोज 14 से 16 घंटे काम कर रहा था। रात को 2:00 बजे सोने के बावजूद उसे कैसे भी करके सुबह 9:00 बजे ऑफिस पहुंचना होता था। टाइम्स ऑफ इंडिया को एक और एक एंप्लई ने बताया किउनके इंडियन आईटी स्टार्टअप के टॉक्सिक वर्क कल्चर, लेटा नाइट शिप्स और कॉन्स्टेंट प्रेशर की वजह से उन्हें एक सीवियर हार्ट अटैक आ गया। बट फॉर्चूनेटली उनकी जान बच गई। मगर नागपुर के एक आईटी प्रोफेशनल का नसीब इतना अच्छा नहीं था। 29 सितंबर को एचसीएल के एक एंप्लई को ऑफिस केवाशरूम में ही हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई। एंड हां जितने भी केसेस डाटा स्टैट्स मैं इस वीडियो में कवर करूंगी उन सबके प्रॉपर सोर्सेस फ्रॉम क्रेडिबल मीडिया आउटलेट्स मैंने नीचे डिस्क्रिप्शन में लिंक कर दिया है। यू मस्ट गो थ्रू देम। नेक्स्ट लेऑफ्स के बारे में तो हम सबजानते हैं। अभी इसी महीने टीसीएस ने उनकी 2% वर्क फोर्स यानी 12,000 एंप्लाइजस को फायर किया है। कंपनी ने हमें बिना नोटिस दिए यहां पे हमें कंपनी से बाहर निकाल दिया है। अगर वो ओवरटाइम पे जबरन रोका जाता है अगर वो मना कर देता है तो उसको निकाल देते हैं। पिछले दो सालों में इंडिया के बिग फोरTCS, Infosys, Wipro एंड कॉग्निजेंट ने ऑलमोस्ट 40 से 42,000 एंप्लाइजस को फायर कर दिया। एंड द लिस्ट गोज ऑन एंड ऑन। जब भी उनसे कोई गलती होती तो उनको वार्निंग लेटर दे दिया जाता और उनको फायर कर दिया जाता था बिना किसी रीजंस के। बट यार एक वक्त था जब आईटी सबका ड्रीम जॉब था। गवर्नमेंट सर्विज की ही तरह आईटीप्रोफेशनल्स को 50 से 60% से भी ज्यादा हक्स ईजीली मिल जाते थे। कईयों को तो कंपनीज़ 100% हक्स में एनरोल करती थी। इंडियन आईटी सेक्टर की शुरुआत 1999 के वाई2 के क्राइसिस से हुई कि जब दुनिया एक पैनिकिक स्टेट में आ गई थी और इंडियन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स ने ग्लोबल इकॉनमी कोएक तरीके से क्रैश होने से बचा लिया था। इसके बाद Infosys, TCS, विp्रो जैसे जाइंट्स ने हजारों इंजीनियर्स यूएस भेजे और वहीं से शुरू हुई इंडिया की ग्लोबल आईटी स्टेज पर एंट्री। मिड 200 में तो आईटी ने इंडिया के जीडीपी में एक मेजर चंक 5.8% कंट्रीब्यूट करना भी शुरू कर दियाथा। और हमारे देश को कई हीरे मिल गए जैसे नारायणणा मूर्ति जिन्होंने वाइफ से ₹10,000 उधार लेके Infosys स्टार्ट किया और आज उनकी कंपनी करोड़ों में कमाती है। शिवनादर जिन्होंने एक तमिलनाडु के गांव से निकल के एचसीएल जैसा एंपायर बनाया। फिर जय चौधरी जो पेड़ के नीचे पड़े और आज एक 30बिलियन डॉलर की आईटी फर्म के मालिक हैं। यह सारे टेकीस बहुत ही हम्ल बैकग्राउंड से आए थे। मगर कुछ ही सालों में यह भारत की शान बन गए। इसीलिए इसके बाद हर एक मिडिल क्लास मां-बाप का एक ही सपना बन गया। मेरा बच्चा आईटी में जाएगा और शुरू हो गया आईटी इंडस्ट्री में टैलेंट का हैवी सप्लाई। आजहालात यह है कि कुछ मां-बाप अपने बच्चों को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाने के लिए अपनी किडनी तक बेचने को तैयार है। मेरे बच्चा पढ़ रहा है। जब मेरा बेटा बोल रहा है कि मेरे को साइंस लेकर पढ़ना था। मैं सोच रहा हूं कैसे साइंस लेकर पढ़ाऊंगा। मेरे पास तो कुछ इनकम भी है नहीं मेरे पास। मैं अपनी किडनी बेचकर बेटेको पढ़ाऊं। इतनी बड़ी कुर्बानी सिर्फ इस उम्मीद में कि आईटी सेक्टर में उनके बच्चे का फ्यूचर सिक्यर्ड रहेगा। अनलाइक ए्री प्रोफेशन नॉट एवरीथिंग इज बैड हियर। इनफैक्ट ऐसे भी केसेस हैं जिसमें आईटी ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। कार्तिक जिसका 2015 में 4.4 लाख सीटीसी से करियर शुरूहुआ वो आज 2025 में 1 करोड़ कमा रहा है। भोपाल का एक उबर ड्राइवर कोडिंग का एक कोर्स करके आईटी सेक्टर में घुस गया और अब अच्छी सैलरी कमा रहा है। मैं जब कस्टमर को पिक करने के लिए एयरपोर्ट पे जाता था और कस्टमर आकर के गाड़ी में बैठते थे तो मेरे को यह फील आता था कि एक दिन ऐसा जरूर आएगाकि मैं एयरपोर्ट से निकलूूंगा, कैब बुक करूंगा और गाड़ी में आकर के ऐसे बैठूंगा। बट सवाल यह है कि क्या आईटी सेक्टर अब भी वो एक ड्रीम फैक्ट्री है जहां मिडिल क्लास का सपना सच होता है या जो डार्क स्टोरीज हमने शुरू में देखी वो सिर्फ कुछ रेयर केसेस नहीं बल्कि एक सिस्टमैटिक टॉक्सिककल्चर का हिस्सा है जो अब जाके धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रहा है सोशल मीडिया की वजह से। आईटी इंडस्ट्री की हारश रियलिटी समझने से पहले आज के कॉर्पोरेट वर्ल्ड में सक्सेस पाने का एक सबसे बड़ा विलेन बन चुका है पुअर कम्युनिकेशन। आईटी, मार्केटिंग, फाइनेंस या एचआर चाहे आप किसीभी इंडस्ट्री में हो, आपके टेक्निकल स्किल्स से ज्यादा मायने रखते हैं आपके कम्युनिकेशन स्किल्स। क्योंकि इट्स लिटरली योर फर्स्ट इंप्रेशन। लेकिन अब सोचो आपने एक इंपॉर्टेंट क्लाइंट को या अपने बॉस को एक मेल भेजा और यह लिख दिया। रेस्पेक्टेड सर, आई एम राइटिंग दिस मेल टू इन्फॉर्म यूदैट माइसेल्फ विल नॉट बी अवेलेबल टुमारो। ऐसा सिर्फ एक ही मेल काफी है आपको एकदम अनप्रोफेशनल और नॉन सीरियस दिखाने के लिए। बट शॉकिंगली एक सर्वे के हिसाब से 62% इंडियंस एडमिट करते हैं कि उनसे प्रोफेशनल ईमेल्स में ग्रामेटिकल एरर्स अक्सर होते हैं। बट नॉट एनी मोर क्योंकि अब क्वल बॉटइसमें आपका एक सीक्रेट वेपन बन सकता है। क्विलबॉट एक एआई राइटिंग टूल है जो आपके गलत ग्रामर वीक बोरिंग सेंटेंसेस या इवन रॉन्ग टोन को स्मार्टली आइडेंटिफाई करके एकदम प्रोफेशनल बना देता है। जैसे हमारे गलत सेंटेंस को ही देख लो। क्वल बॉट ने कितना पॉलिश्ड और इंपैक्टफुल बना दिया।कुछ इसी तरह आप बड़े-बड़े पैराग्राफ्स को भी क्वलबॉट की मदद से विद इन सेकंड्स एकदम परफेक्ट बना सकते हो। एंड अपने हिसाब से अपनी राइटिंग का टोन भी सेट कर सकते हो। जैसे फॉर्मल, क्रिएटिव या फिर फ्लूएंट। इसका सबसे बेस्ट पार्ट आपको अलग से कुछ कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस करना नहीं पड़ता।क्वलbot Chrome एक्सटेंशन इंस्टॉल करो और बस Google DX Gmail या इवन Powpin प्रेजेंटेशंस में लिखते वक्त जैसे ही आप टेक्स्ट सेलेक्ट करके क्वलbot का ऑप्शन सेलेक्ट करोगे तुरंत आपको एक रिफाइंड और एरर फ्री वर्जन मिल जाता है। यानी अब से आपके प्रमोशंस या फिर क्लाइंट डील्स सिर्फवीक इंग्लिश की वजह से नजरअंदाज नहीं होंगे। तो सिर्फ एक मेल क्विलब से लिख के देखो। यू विल डेफिनेटली सी अ मेजर डिफरेंस। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। आप जाके ट्राई कर सकते हो। नाउ लेट्स कम बैक टू आवर टॉपिक। तो सबसे पहले यह बात समझो कि इंडियन आईटी इंडस्ट्री में दो टाइप्सके कंपनीज होती है। प्रोडक्ट बेस्ड कंपनीज़ जिनके खुद के प्रोडक्ट्स होते हैं जैसे कि Google, Amazon, Flipkart। लेकिन यह सिर्फ टॉप स्किल डेवलपर्स को ही हायर करते हैं। अब इंडिया की प्रॉब्लम यह है कि सिर्फ 2.68% फ्रेश इंजीनियर्स ही इस स्किल सेट को मैच कर पाते हैं। इसीलिए मेजॉरिटीइंजीनियर्स दूसरे टाइप ऑफ कंपनीज़ में ज्वॉइ करते हैं जो होती है सर्विस बेस्ड कंपनीज़ जैसे TCS, Infosys, WPRO वगैरह जो दूसरे ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए आईटी सर्विज प्रोवाइड करते हैं। इंडिया में 54 लाख से भी ज्यादा लोग इन्हीं सर्विस बेस्ड कंपनीज़ में काम कर रहे हैं। और एक्चुअलीइन्हीं कंपनीज़ की दुनिया भर में डिमांड भी काफी हाई है। क्योंकि इंडिया इन एमएसीस के लिए एक चीप लेबर हब है। एग्जांपल के लिए एक इंडियन आईटी एंप्लई को हायर करने के लिए एक अमेरिकन के कंपैरिजन में 70% सस्ता पड़ता है। सोचो कितना बड़ा प्रॉफिट मार्जिन है। बट एक आईटी ग्रेजुएट के लिएरियल स्ट्रगल तब शुरू होता है जब डिग्री के साथ उसे कॉलेज प्लेसमेंट तो मिल जाता है लेकिन फिर भी उसे अनइंप्लॉयड बनके रहना पड़ता है। ग्रेजुएट्स एंड पोस्ट ग्रेजुएट्स आर अनइंप्लॉयड रेडी टू वर्क फॉर ���ज लेस इज ₹4000 पर मंथ। मैंने बीटेक किया हुआ है वो भी कंप्यूटर साइंस से ही। कॉलेज प्लेसमेंट मिली थी।एमएनसी का एक्सपीरियंस हो चुका है मुझे 2.5 साल का। लगभग मैंने 100 प्लस या 150 प्लस कंपनीज़ में अप्लाई किया होगा। बट मुझे अभी तक एक भी कॉल नहीं आया है। महाराष्ट्र की सोनल जिसे कार्तिक कुमार की ही तरह डिग्री हाथ में आने से पहले ही प्लेसमेंट मिल गई थी। लेकिन 2 साल से वोInfosys के जॉइ लेटर का इंतजार ही कर रही है। बैंक वाले उसके घर तक पहुंच गए हैं। वो ऑफर लेटर दिखा के जैसे तैसे उन्हें टाल रही है। मगर ऐसा चलेगा कब तक? आज इंडिया के आईटी सेक्टर में कई फ्रेशर्स को ऑफर लेटर मिलने के बाद भी दो से तीन साल तक वेट करना पड़ रहा है। इसे आईटी इंडस्ट्रीमें ऑनबोर्डिंग बेंचिंग कहते हैं जो इसीलिए होता है क्योंकि यह सर्विस बेस्ड कंपनीज़ अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के एस्टीमेट्स पे ही हायरिंग करती है। सो अगर कल को प्रोजेक्ट डिले हुआ तो वो एंप्लाइजस का जॉइनिंग डेट भी डिले हो जाता है। एंड कई बार सालों तक। बट फाइनली जब एक फ्रेशर कोजॉब मिलती है, जानते हो इंडिया में उनकी एवरेज सैलरी कितनी है? 3 टू 5 लै पर एनम। पिछले 10 सालों में Infosys, TCS, विp्रो ने फ्रेशर्स की सैलरी 3 लाख के आसपास ही फ्रीज करके रखी हुई है। जो कि कई कॉलेजेस की 15 लाख की एडमिशन फीस के सामने कुछ भी नहीं है। आज की जॉब मार्केट में सबके लगे पड़े हैं।वो पुराने दिन चले गए जब मार्केट में पैसा था। लोगों ने भरभर के स्विच करा। 10 लाख वाले, 25 लाख पे पहुंच गए, 20 लाख, वाले, 40 लाख पे पहुंच गए। आज के टाइम में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। एस्पेशली यू आर अ फ्रेशर हु ट्राइंग टू लुक फॉर अ जॉब, योर कुक् अब एक बार जॉइनिंग कर लिया। इसके बाद शुरूहो जाता है स्ट्रगल ऑफ ओवरवर्क। कई कंपनीज में रोज के 14 से 16 घंटे काम करना एकदम नॉर्मल है। एक बेंगलुरु के आईटी एंप्लई ने बताया वो पिछले 2ाई साल से हर दिन 14 से 16 घंटे काम करने के बाद भी रात को 2:00 बजे सोता है। लेकिन इसके बाद भी उसे सुबह 9:00 बजे तक ऑफिस पहुंच जाना पड़ता है। औरहां, रात में भी नींद मिलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इट्स ओवर 12। मेरा बेटा यहां सो चुका है। अपने डैडी का वेट करते-करते किचन में खाना बना रखा है? क्योंकि मेरे हस्बैंड को खाने का टाइम नहीं मिला। क्या करूं? मेरे को समझ में नहीं आ रहा। आप बोल रहे हो मैं कर रहा हूं। मेरे को पता भी नहीं हम क्या करसुबह से अभी तक एंड आई डोंट नो कब तक चलने वाला है। एक दूसरे एंप्लॉय ने लिखा कि उसने चार दिन तक रात भर जाग कर एक फाइनेंस प्रोग्राम मॉनिटर किया। वो पूरे दिन में सिर्फ 4 घंटे ही सो पाता था और उसके शब्दों में यह प्योर टॉर्चर था। दूसरे आईटी सपोर्ट इंजीनियर को रात 1:30 बजेमैसेज आता है कि सुबह 6:00 बजे उसे शिफ्ट जॉइ करनी है। जबकि वो ऑलरेडी एक रात पहले देर रात तक काम कर चुका था। अब ओवरवर्क के बाद भी अगर फ्यूचर में आप लीडरशिप रोल्स चाहते हो तो इसके लिए अपना काम पूरा करके आपको एक्स्ट्रा रुकना पड़ता है। एक सीनियर डेवलपर ने बताया कि उसे हर हफ्ते ऑफिस केकाम के बाद 20 घंटे की कंपलसरी अनपेड लर्निंग करनी पड़ती है। सिर्फ इसीलिए ताकि वो लीडरशिप रोल के लिए क्वालिफाई हो जाए और इस वजह से अब उसे ए्जायटी और चेस्ट पेन होने लगा है। एंड ये सिर्फ इंडिविजुअल स्ट्रगल्स नहीं है। मै लेवल पे भी डाटा उतना ही डरावना है। इंडिया टुडे मेंपब्लिश्ड एक सर्वे में 1450 इंडियन आईटी प्रोफेशनल्स ने बताया 72% लोग हर हफ्ते लीगल 48 आवर्स शिफ्ट से भी ज्यादा काम करते हैं। 25% एंप्लाइजस तो हर हफ्ते 70 आवर्स से भी ज्यादा काम करते हैं। 83% टेकीस बर्न आउट फील कर रहे हैं और 68% पे आफ्टर ऑफिस भी ऑनलाइन रहने का प्रेशर होताहै। इसीलिए 2025 के अंत तक लगभग 22 लाख आईटी एम्प्लाइजस इस बर्न आउट की वजह से जॉब छोड़ने की प्लानिंग क�� रहे हैं। अब आई नो आप यही सोच रहे होंगे कि ऐसे में वो एचआर से कंप्लेन क्यों नहीं करते? बट इसका नतीजा क्या होता है जानते हो? एचआर आपसे मीटिंग लेके एक रिटन एपोलॉजी साइन करनेबोलता है क्योंकि आपने अपनी एक हारश रियलिटी सच्चाई सबके सामने रखने की हिम्मत की। एटलीस्ट कई फोरम्स पे आईटी एंप्लाइजस ने यही लिखा है। बट आप लोग के अपने-अपने कंपनीज़ के एचआर्स के बारे में क्या ओपिनियंस है? आप नीचे कमेंट सेक्शन में शेयर कर सकते हो। लेकिन चलो इतनी मेहनतकरने के बाद भी एक इंसान सोचेगा कि अब नहीं तो आगे जाके अच्छी सैलरी मिलेगी। बट यह है इंडियन आईटी सेक्टर की टॉप कंपनीज़ का हक स्ट्रक्चर। 2022 से इन कंपनीज़ का हक परसेंटेज गिरता ही जा रहा है। सैलरी हक् जैसे ऑलमोस्ट पॉज हो चुकी है। इस साल तो कंपनीज़ ऑन एन एवरेज सिर्फ 4 से 7% की हीहक् दे रही है। बट ये सिंगल डिजिट हक्स भी ऐसे ही आसानी से नहीं मिलती है। कई कंपनीज़ जैसे कि एलटीआई माइंड ट्री के प्रोजेक्ट लीड्स, मैनेजर्स और आर्किटेक्ट्स को हक मिलने के लिए कोडिंग और मैथ्स के कॉम्पिटेंट टेस्ट देने पड़ते हैं। फिर चाहे उनका पिछला टर्म या फिर साल का प्रैक्टिकलऑन ग्राउंड परफॉर्मेंस कितना भी अच्छा क्यों ना हो लेकिन उनका हक डिपेंड करेगा उनके इस टेस्ट के परफॉर्मेंस पे। TCS ने तो ये चार क्राइटेरिया रखा है जिन्हें एम्प्लाइजस को पूरा करना ही पड़ता है। कुछ रिपोर्ट्स के हिसाब से विp्रो में मोस्टली सिर्फ टॉप परफॉर्मर्स को ही हक्स मिलती हैऔर एचसीएल में ऐसी कोई कंडीशन मुझे नहीं मिली। लेकिन यहां के एंप्लाइजस को ऑन एन एवरेज ह वन या 5% ही मिलता है। कई टेक जंट्स के एम्प्लाइजस का यह भी कहना है कि चाहे हमारी परफॉर्मेंस रेटिंग कितनी भी पॉजिटिव हो फिर भी हक हमारा डिले होता ही है और कभी मिला भी तो सिर्फ दो-3000 का ही हक मिलता है।TCS, Infosys और बाकी जो भी कंपनीज़ है पिछले कई सालों से उन्होंने बहुत ज्यादा ऐसा कुछ सैलरी हक दिया नहीं है। Infosys में क्या हक हो रहा है? चार साल में 11% बढ़े हैं। पूरे चार साल में मिलाके। किसी साल मिले ही नहीं है। किसी साल 4%, किसी साल 3%. व्हाट्स द स्टार्टिंग सैलरी नाउ फॉर फ्रेशर्स?इटज़ बीन देअर द सेम सैलरी व्हाट वी हैव बीन गिविंग फॉर लास्ट सो मेनी इयर्स। व्हाई इज इट दैट फ्रेशर सैलरीज फॉर इंजीनियर्स नॉट गॉन अप इन द लास्ट सो मेनी इयर्स। 2024 के डाटा के मुताबिक सिर्फ 11.5% एम्प्लाइजस को प्रमोशन मिला। यानी 100 में से बस 11 लोगों को। विp्रो का यह एग्जांपलले लो। पिछले पूरे साल में सिर्फ 31 एंप्लाइजस को ही प्रमोशन मिली थी। बट ऑन द कॉन्ट्ररी बिज़नेस टुडे के हिसाब से पिछले 10 साल में Infosys WPRO और TCS के सीईओस की सैलरी 15500% से बड़ी है। लेकिन फ्रेशर्स की सिर्फ 50% फ्रेशर्स होते हैं उनकी सैलरी तीन या 4 लाख के आसपास ही रहती है। और जो सीईओसी हैउनकी लाखों करोड़ों में सैलरीज है। अब सैलरीज के अलावा इस इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है जॉब सेफ्टी। आईटी इंडस्ट्री में एक बड़ा सीक्रेट है जो जानते तो सब है मगर कोई खुल के एक्सेप्ट नहीं करता है। इसका नाम है द 404 सिंड्रोम। एक टॉप कंपनी के सीईओ शांतनु देश पांडे ने एक बहुत इंपॉर्टेंट बात कही।जो लोग अपने 40ज में होते हैं उनके ऊपर सबसे ज्यादा फाइनेंसियल बर्डन होता है। बच्चों की स्कूलिंग, पेरेंट्स की हेल्थ केयर और घर के एमाइस। लेकिन अनफॉर्चूनेटली अभी इसी एज ग्रुप के लोग आईटी में सबसे ज्यादा वनरेबल हो गए हैं टू ले ऑफ्स। कोरा रेडिट और बाकी कई जॉब फोरम्स ऐसे कमेंट सेभरे हुए हैं जिसमें लोगों ने लिखा है कि 40 के बाद तो आईटी में फ्यूचर ही नहीं है। उन्हें अपने ऑफिस में कोई 40 के ऊपर का एंप्लई ज्यादा दिखता ही नहीं है और डाटा भी इसी बात को सपोर्ट करता है। एनालिटिक्स इंडिया मैगजीन के सर्वे के हिसाब से Infosys और TCS जैसे टॉप फर्म्स के 50%एंप्लाइजस 20 से 35 इयर्स के एज ग्रुप में हैं। 40% लोग 35 से 50 के एज ग्रुप में है और सिर्फ 10% लोग ही 50 के ऊपर वाले हैं। यह डाटा दिखा रहा है कि आईटी सेक्टर में शायद अब रिटायरमेंट का एज 58 नहीं है बट 40ज और अर्ली 50ज में है। Infosys के खिलाफ तो यूएस में एज डिस्क्रिमिनेशन काकेस भी फाइल हो चुका है क्योंकि वो एजेड कैंडिडेट्स को हायर नहीं करते हैं। इसके पीछे परसेप्शन यह है कि ओल्डर एंप्लाइज स्लो अडप्ट करते हैं नए टूल्स और टेक्स्ट सीखने में और टाइम लगाते हैं बट उनका पैकेज काफी हाई होता है। जैसे-जैसे उनकी सन्योरिटी बढ़ती जाती है, वो 40 लै से ऊपरका पैकेज एक्सपेक्ट करते हैं। जो आईटी कंपनीज के लिए काफी बड़ा ओवरहेड कॉस्ट होता है और इसीलिए द प्रिंट ने इसे द 40-4 सिंड्रोम नाम दिया है। और अब तो मार्केट में एआई आ गया है। पहले तो लोगों को लगता था कि अगर जॉब चली गई है तो शायद परफॉर्मेंस खराब होगा या एज फैक्टर होगा।लेकिन अब तो कंपनीज़ ओपनली कह रही है कि हम एआई की वजह से लोगों को रिप्लेस कर रहे हैं। रिसेंटली Microsoft ने अपनी 2% वर्क फोर्स को फायर कर दिया। अराउंड 50,000 लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए। रीजन क्योंकि कंपनी को एi टेक में ट्रांजिशन करना है। इतना ही नहीं Microsoft ने एआई डिवीजन केडायरेक्टर को भी तक निकाल दिया। Microsoft अनाउंस्ड अनदर राउंड ऑफ़ मैसिव लेऑफ। द टेक कंपनी इज लेइंग ऑफ अबाउट 9000 एम्प्लाइज। Microsoft इज नॉट अलोन। Google, Amazon, मेटा दे हैव ऑल गॉन थ्रू राउंड्स ऑफ़ लेऑफ्स। वन रीज़न कीप्स शोइंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। 60% ऑफ़ ऑल जॉब्स चेंज्ड बिटवीन 1940 एंडटुडे। आई डु बिलीव दैट एआई इज गोइंग टू रिप्लेस अ लॉट ऑफ़ व्हाट आई ऍम कॉलिंग वाइट कॉलर क्लेरिकल जॉब्स। पर इसमें एक बात गौर करने वाली ये है कि मोस्टली सीनियर और मिड लेवल एम्प्लाइजस को फायर किया जा रहा है। ऑब्वियसली सैलरीज बचाने के लिए। फिर टीसीएस ने भी लगभग 12,000 लोगों को हटा दिया। वो भी मोस्टलीमिड और सीनियर लेवल एंप्लाइजस ही थे। कंपनी ने रीज़न दिया कि उन सबका स्किल सेट मैच नहीं करता। सो शायद यहां भी वो एआई लेड प्रोजेक्ट्स के लिए स्किल्स की बात कर रहे थे। मतलब इन आईटी कंपनीज़ में जो लोग नए टूल्स और टेक के साथ अपस्किल नहीं हो पा रहे हैं उन्हें सबसे पहले टारगेट कियाजा रहा है। अब देखो कंपनीज़ एआई के नाम पे मोस्टली दो तरह की जॉब्स हटा रही है। सबसे पहला तो मिड लेवल मैनेजर्स का। क्योंकि पहले मैनेजर्स के तीन मेजर काम होते थे। फर्स्ट कोऑर्डिनेशन का काम जैसे टास्क असाइन करना, डेडलाइंस को ट्रैक करना वगैरह। लेकिन आज आसना, ट्रेलो, mi.comजैसे एi टूल्स ये सब काम रियल टाइम में कर रहे हैं। वो भी बिना ह्यूमन एरर के। दूसरा रिपोर्टिंग वाला काम। पहले मैनेजर रिपोर्ट्स बनाते थे और डाटा एनालाइज करते थे। लेकिन आज पावर, बीआई, टैबलो जैसे टूल्स खुद से डाटा एनालाइज करके डैशबोर्ड्स बनाते हैं। इंसाइट्स निकालते हैं वो भी चुटकियों में। तीसरा डिसीजनमेकिंग वाले काम। डेली ऑपरेशंस और क्राइसिस सॉल्व करना मैनेजर का काम था। लेकिन अब प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और एमएल एल्गोरिदम्स मतलब कुछ स्पेशल एआई टूल्स बस प्रोजेक्ट के डिटेल्स देने पर ही पहले से बता देते हैं ट्रेंड्स एनालाइज करके कि कौन सी प्रॉब्लम आ सकती है और उसके सशंसक्या हो सकते हैं। अब मिड लेवल मैनेजर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंपैक्ट हो रहा है डेवलपर्स पे। कॉर्नर यूनिवर्सिटी के एक एक्सपेरिमेंट में एक डेवलपर और एक एआई गेट हब को पायलट के बीच में कोडिंग स्पीड की रेस हुई एंड द रिजल्ट्स विल ब्लो योर माइंड। कोपायलट ने ह्यूमन से 55.8%फास्ट कोड लिखा। यानी अब एक डेवलपर की जगह आधे से भी कम टाइम में एi वही काम कर रहा है। सत्यनंदला ने खुद कहा है कि Microsoft की 30% कोडिंग आज एi टूल्स से होती है और आयरनी यह है कि Microsoft ने उन डेवलपर्स को भी निकाल दिया है जिन्होंने एi टूल्स बनाने में मदद की थी। और एi की कॉस्टएफिशिएंसी तो कंपनीज के लिए एक जैकपॉट बन चुकी है। एक ग्लोबल थिंक टैंक मीटर ने टेस्ट करके बताया कि एi सिर्फ $2 या उससे कम कॉस्ट में भी बग्स फिक्स कर सकता है वो भी मिटो में। सो मैथ्स यहां यह है कि जब एक काम $2 में हो सकता है तो एक कंपनी $ लाख पर मंथ क्यों देगी? एंड एआई के अलावाएक और एक चीज है जो आईटी एम्प्लाइजस को कास्टेंटली आउटपेस कर रही है। तेज रफ्तार से बदलती प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। देखो आईटी सेक्टर में कोई भी ऐप या वेबसाइट बनाने के लिए डेवलपर्स अलग-अलग कोडिंग लैंग्वेज यूज करते हैं। जैसे जावा, Python, Swift वगैरह। लेकिन प्रॉब्लम यहहै कि ये लैंग्वेजेज़ अब हर कुछ सालों में ही ऑब्सोलेट हो जा रही हैं। 2017 के पहले Android एप्स मोस्टली जावा में बनती थी। लेकिन आज कॉटलिंग लैंग्वेज ने उसे रिप्लेस कर दिया है। मेटा, ओलx, Amazon जैसे जॉइंट्स ने अपना पूरा कोड कॉटलिन में ही रीाइट कर दिया है। Apple ने भी 2014 केबाद ऑब्जेक्टिव सी लैंग्वेज को ऑलमोस्ट रिटायर करके Swift को मैंडेटरी कर दिया। वेब डेवलपमेंट में भी पहले पर्ल यूज़ होती थी। अब Python, जावास्क्रिप्ट और रस्ट डिमांड में है। बेसिकली हर दो-तीन सालों में नए फ्रेमवर्क्स और लैंग्वेजेस आ जाते हैं। इतनी स्पीड से नए लैंग्वेज अपडेट होरहे हैं कि कई मिड लेवल डेवलपर्स को एडप्ट करने के टाइम मिले बिना ही उनका स्किल सेट इररेिलेवेंट होते जा रहा है। व्हेन यू लर्न अ कंसेप्ट ऑफ अ कोडिंग लैंग्वेज, लाइब्रेरी और एपीआई, देयर इज ऑलवेज पॉसिबिलिटी दैट इट विल बिकम ओल्ड एंड ऑब्सोल्यूट इन नेक्स्ट फ्यू इयर्स। और इन सबके अलावा एक और एक बड़ा फैक्टर हैसरकारी पॉलिसीज। 2020 के बाद से गवर्नमेंट ने कई आईटी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन यानी कि सेल्स के टैक्स बेनिफिट्स हटा दिए और वर्क फ्रॉम होम के लिए नए स्ट्रिक्ट रूल्स ला दिए। अब कंपनीज़ को फुल टैक्स देना पड़ता है और रिमोट वर्क के बावजूद 50% स्टाफ को ऑफिस बुलाना पड़ता है। अगेन एक और एक बेनिफिट जोपहले आईटी एम्प्लाइजस को मिलता था। अब धीरे-धीरे वो भी घटता जा रहा है। कंपनीज़ ने पहले वन डे वर्क फ्रॉम ऑफिस से स्टार्ट किया। लेकिन अब धीरे-धीरे टू थ्री से वो कंप्लीटली वर्क फ्रॉम ऑफिस कल्चर में शिफ्ट होने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अब इसका अंजाम यह हो रहा है कि कंपनीज़ के लिएकॉस्ट बढ़ रही है बट प्रॉफिट्स घट रहे हैं। सो इसका सशन बन रहा है मास फायरिंग। सो ये थे सभी रीज़ंस बिहाइंड स्ट्रेसफुल एंड टॉक्सिक वर्क कल्चर एंड आईटी। बट मुझे पर्सनली इस सेक्टर की सबसे बड़ी एंड कोर प्रॉब्लम पता है क्या लग रही है? डिमांड से कहीं ज्यादा लेवल का सप्लाई। आपने ऐसीन्यूज़ सुनी होगी। पुणे में 100 जॉब्स के लिए 3000 इंजीनियर्स लाइन में खड़े हैं। गुजरात में सिर्फ 10 वैकेंसीज के लिए 1000 लोग इंटरव्यू देने आ गए हैं। इंडस्ट्री की सिचुएशन इतनी खराब है कि पिछले साल 15 लाख इंजीनियर्स ग्रेजुएट हुए लेकिन सिर्फ 70,000 फ्रेशर्स को ही जॉब मिली। मतलब जितनी वैकेंसीज भी नहीं हैउससे भी ज्यादा लोग हजारों लोग काम के लिए रेडी बैठे हैं। इसका फायदा जाहिर है कंपनीज उठा रही है। वो एम्प्लाइजस को चाहे जैसे भी ट्रीट करें एंप्लाइज उसे चुपचाप सह लेते हैं। क्योंकि दोनों जानते हैं कि बाहर हजारों लोग उन्हें रिप्लेस करने के लिए बस इंतजार कर रहे हैं। नाउ द क्वेश्चनइज हाउ टू एस्केप दिस लूप? क्या इसका मतलब यह है कि आईटी सेक्टर बिल्कुल खत्म हो चुका है। किसी को उसे जॉइ नहीं करना चाहिए? बिल्कुल नहीं। मैं कई लोगों को जानती हूं जो आईटी में है एंड हु आर हैप्पी विद देयर सैलरी एंड कंपनसेशन। लेकिन हां वर्क कल्चर और टाइमिंग्स को लेकर मेरे भी फ्रेंड्स उतने खुश नहीं है।लेकिन इस वीडियो से एक बात सबको समझ जानी चाहिए कि आईटी इज नो लगर अ सेफ ज़ोन। इनफैक्ट इट हैज़ बिकम अ वॉर ज़ोन। और बैटल फील्ड में सिर्फ वही टिकता है जो कास्टेंटली खुद को अपग्रेड करता है। जैसे नारायण मूर्ति ने भी कहा था लर्न, अनलर्न एंड देन रीलर्न। दैट इज द ओनली वे टूसर्वाइव दिस इंडस्ट्री। आज भी कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने टाइम पर अपस्किल किया और ऐसे फ्यूचर प्रूफ स्किल्स सीखे जिन्होंने उन्हें इरिप्लेसेसबल बना दिया। जैसे किसी ने क्लाउड सीखा, किसी ने डाटा इंजीनियरिंग और किसी ने एआई टूल्स और आज वो या तो फॉरेन कंपनीज़ के लिए रिमोट काम कर रहे हैंया खुद का फ्रीलांसिंग क्लाइंट्स हैंडल कर रहे हैं ऑन देयर ओन टर्म्स। जैसे ये 32 साल के इंजीनियर जिन्होंने 2015 में एक टायर टू कॉलेज से इंजीनियरिंग की और एज अ सॉफ्टवेयर डेवलपर 4.4 लैक्स के पैकेज से उनकी शुरुआत हुई। लेकिन फिर 2019 में उन्होंने अपस्किल किया और उन्हें सीधा ₹17लाख का पैकेज मिल गया और आज ऐसे ही अपस्किल करते-करते वो ₹1 करोड़ कमा रहे हैं। कहने का मतलब है इंडस्ट्री टॉक्सिक हो सकती है लेकिन हर एक एंप्लॉय की कहानी वो खुद लिखता है। तो अब सवाल यह नहीं है कि आईटी इंडस्ट्री आपके साथ क्या करेगी? सवाल यह है कि आप आईटी इंडस्ट्री में बनेरहने के लिए क्या करने वाले हैं? या फिर इस पूरे लूप से ही बाहर निकलने के लिए आप क्या करने वाले हो? अगेन मेरे कुछ फ्रेंड्स हैं जिन्होंने आईटी फील्ड से बाहर निकलकर अपना खुद का स्माल स्किल बिजनेस स्टार्ट कर लिया या फिर किसी ने फील्ड ही चेंज कर लिया। बट अगेन मेरा यह वीडियो किसी को भी डराने के लिए नहीं है।यह बस एक रियलिटी चेक है कि सिर्फ आईटी इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा रफ्तार से बदल रही है। शायद पूरी हिस्ट्री में टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से कभी इवॉल्व नहीं हुई होगी। मगर परिवर्तन ही तो प्रकृति का नियम है। और इसीलिए आज का मैसेज एकदम सिंपल है। इटइज नॉट द स्ट्रांगेस्ट ऑफ द स्पीशीज दैट सर्वाइव्स नॉर द मोस्ट इंटेलिजेंट बट इट इज द वन दैट इज द मोस्ट एडप्टेबल टू चेंज। जय हिंद। एंड हां, जाने से पहले डू नॉट फॉरगेट टू चेक आउट क्वब जो आपके सारे ईमेल्स, प्रेजेंटेशंस, असाइनमेंट्स, सारी चीजों में आपके इंग्लिश ग्रामर को बहुत ज्यादाइंप्रूव कर सकता है। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन।

_ I think I आखिर क्यों कुछ आईटी कंपनीज एम्प्लाइजस को हायर करने के बाद भी 3 सालों तक उन्हें कंपनी जॉइन ही नहीं करने दे रहे हैं, सैलरी भी नहीं दे रहे हैं। अगर आप लोग भी ये सोचते हैं आईटी की जॉब बहुत ग्लैमरस है, बहुत पैसा है चमक-धमक तो ये वीडियो आपके लिए है। पास्ट कपल ऑफ़ डेज दीज़ पिक्चर्स हैव बीन गोइंग वायरल। शोइंग 100्स ऑफ़ Infosys ट्रेनीज़ स्क्रैबलिंग टू फाइंड ट्रांसपोर्ट टू हेड बैक टू देयर होमटाउंस। दीज़ आर यंग एम्प्लाइज़ हुवर सेंट ऑफर लेटर्स बैक इन 2022 बट वर नॉट ऑन बोर्डेड अंटिल लेट 2024। अप्रैल 2022 में कार्तिक कुमार जबलपुर के एक टॉप टेक कॉलेज से ग्रेजुएट हुआ। Infosys ने उसे कैंपस प्लेसमेंट में ही हायर करके ऑफर लेटर भी दे दिया। कार्तिक खुश था। सोच रहा था कि 5 लाख का एजुकेशन लोन अब वो आराम से चुका देगा। लेकिन आज 3 साल बाद भी कार्तिक सिर्फ दो ही ईएमआई भर पाया है क्योंकि हायर होने के बावजूद Infosys ने उसे आज तक जॉइ ही नहीं करवाया है। कंपनी के रिकॉर्ड्स में कार्तिक अभी भी ऑनबोर्डिंग बेंच पे है यानी उसे जॉब मिल तो गई है पर सैलरी नहीं और जॉइनिंग कब होगी इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। मतलब बेसिकली कार्तिक के पास नौकरी होते हुए भी वो अनइंप्लॉयड है। एक दूसरे आईटी एंप्लई ने रेडिट पर पोस्ट किया कि आज ही मुझे हक मिला है और मेरी सैलरी पूरे 1% से बढ़ गई है। उसने लिखा कि उसके पास 3 साल का एक्सपीरियंस है। उसने हर दिन 121 घंटे काम किया है। अपने वीकेंड्स भी सैक्रिफाइस किए पर रिवॉर्ड मिला सिर्फ 1% ह। एंड द सैडेस्ट पार्ट इज कि यह कोई इकलौता केस नहीं है। इसी पोस्ट के नीचे के कमेंट्स पढ़ोगे तो आपको लगेगाकि एक से 5% का हक्स आईटी इंडस्ट्री में एक नॉर्म बनते जा रहा है। प्रमोशन के टाइम पर आपके साथ खिलवाड़ किया जाता है। ये नहीं देखा जाता कि आप कितने डिर्विंग हो और यहां आना चाहते हैं लोग। अपना करियर बना रहे हैं। अपनी लाइफ सेटल कर रहे हैं। अपने मां-बाप को आराम सुख चैन देने। यह मेरा शायद अब तक का सबसेकंट्रोवर्शियल वीडियो होने वाला है। इस पर मैंने एक भी नाम नहीं छुपाया है। आईटी के कई टॉप फर्म्स का नाम ओपनली लिया है। एंड इसीलिए यह एक बड़ा रिस्क है। मार्केट में पैसा था। लोगों ने भरभर के स्विच करा 10 लाख वाले 25 लाख पे पहुंच गए। 20 लाख वाले 40 लाख पे पहुंच गए। आजके टाइम में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। इफ यू आर रियली पैशनेट अबाउट इट देन ओनली डू इट। अदरवाइज डोंट डू इट। मोस्ट प्रोबेबली आर गोना गिव अप। आई नो नारायण मूर्ति कंजूस है। लेकिन इतना हो सकता है यह वीडियो डिलीट भी हो जाए। इसीलिए प्लीज इसे जितना हो सके शेयर करो ताकि इंडिया के लाखों कॉर्पोरेटएम्प्लाइजस की आवाज दबे ना। क्योंकि अब बात सिर्फ बर्नआउट्स या फिर अनफेयर हक्स की नहीं है। अब यह जिंदगी और मौत का सवाल बन चुका है। किसी 25 साल के लड़के ने लिखा उसको एक-ए महीने तक जब उसके फादर आईसीयू में भर्ती थे, तड़प रहे थे और उसको छुट्टी नहीं मिली। जिंदगी गवा दी उसके फादर ने।बेंगलुरु के एक आईटी एंप्लई ने लिखा कि मुझे लगता है मैं जल्द ही मरने वाला हूं। क्यों? क्योंकि वो पिछले 2ाई साल से रोज 14 से 16 घंटे काम कर रहा था। रात को 2:00 बजे सोने के बावजूद उसे कैसे भी करके सुबह 9:00 बजे ऑफिस पहुंचना होता था। टाइम्स ऑफ इंडिया को एक और एक एंप्लई ने बताया किउनके इंडियन आईटी स्टार्टअप के टॉक्सिक वर्क कल्चर, लेटा नाइट शिप्स और कॉन्स्टेंट प्रेशर की वजह से उन्हें एक सीवियर हार्ट अटैक आ गया। बट फॉर्चूनेटली उनकी जान बच गई। मगर नागपुर के एक आईटी प्रोफेशनल का नसीब इतना अच्छा नहीं था। 29 सितंबर को एचसीएल के एक एंप्लई को ऑफिस केवाशरूम में ही हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई। एंड हां जितने भी केसेस डाटा स्टैट्स मैं इस वीडियो में कवर करूंगी उन सबके प्रॉपर सोर्सेस फ्रॉम क्रेडिबल मीडिया आउटलेट्स मैंने नीचे डिस्क्रिप्शन में लिंक कर दिया है। यू मस्ट गो थ्रू देम। नेक्स्ट लेऑफ्स के बारे में तो हम सबजानते हैं। अभी इसी महीने टीसीएस ने उनकी 2% वर्क फोर्स यानी 12,000 एंप्लाइजस को फायर किया है। कंपनी ने हमें बिना नोटिस दिए यहां पे हमें कंपनी से बाहर निकाल दिया है। अगर वो ओवरटाइम पे जबरन रोका जाता है अगर वो मना कर देता है तो उसको निकाल देते हैं। पिछले दो सालों में इंडिया के बिग फोरTCS, Infosys, Wipro एंड कॉग्निजेंट ने ऑलमोस्ट 40 से 42,000 एंप्लाइजस को फायर कर दिया। एंड द लिस्ट गोज ऑन एंड ऑन। जब भी उनसे कोई गलती होती तो उनको वार्निंग लेटर दे दिया जाता और उनको फायर कर दिया जाता था बिना किसी रीजंस के। बट यार एक वक्त था जब आईटी सबका ड्रीम जॉब था। गवर्नमेंट सर्विज की ही तरह आईटीप्रोफेशनल्स को 50 से 60% से भी ज्यादा हक्स ईजीली मिल जाते थे। कईयों को तो कंपनीज़ 100% हक्स में एनरोल करती थी। इंडियन आईटी सेक्टर की शुरुआत 1999 के वाई2 के क्राइसिस से हुई कि जब दुनिया एक पैनिकिक स्टेट में आ गई थी और इंडियन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स ने ग्लोबल इकॉनमी कोएक तरीके से क्रैश होने से बचा लिया था। इसके बाद Infosys, TCS, विp्रो जैसे जाइंट्स ने हजारों इंजीनियर्स यूएस भेजे और वहीं से शुरू हुई इंडिया की ग्लोबल आईटी स्टेज पर एंट्री। मिड 200 में तो आईटी ने इंडिया के जीडीपी में एक मेजर चंक 5.8% कंट्रीब्यूट करना भी शुरू कर दियाथा। और हमारे देश को कई हीरे मिल गए जैसे नारायणणा मूर्ति जिन्होंने वाइफ से ₹10,000 उधार लेके Infosys स्टार्ट किया और आज उनकी कंपनी करोड़ों में कमाती है। शिवनादर जिन्होंने एक तमिलनाडु के गांव से निकल के एचसीएल जैसा एंपायर बनाया। फिर जय चौधरी जो पेड़ के नीचे पड़े और आज एक 30बिलियन डॉलर की आईटी फर्म के मालिक हैं। यह सारे टेकीस बहुत ही हम्ल बैकग्राउंड से आए थे। मगर कुछ ही सालों में यह भारत की शान बन गए। इसीलिए इसके बाद हर एक मिडिल क्लास मां-बाप का एक ही सपना बन गया। मेरा बच्चा आईटी में जाएगा और शुरू हो गया आईटी इंडस्ट्री में टैलेंट का हैवी सप्लाई। आजहालात यह है कि कुछ मां-बाप अपने बच्चों को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाने के लिए अपनी किडनी तक बेचने को तैयार है। मेरे बच्चा पढ़ रहा है। जब मेरा बेटा बोल रहा है कि मेरे को साइंस लेकर पढ़ना था। मैं सोच रहा हूं कैसे साइंस लेकर पढ़ाऊंगा। मेरे पास तो कुछ इनकम भी है नहीं मेरे पास। मैं अपनी किडनी बेचकर बेटेको पढ़ाऊं। इतनी बड़ी कुर्बानी सिर्फ इस उम्मीद में कि आईटी सेक्टर में उनके बच्चे का फ्यूचर सिक्यर्ड रहेगा। अनलाइक ए्री प्रोफेशन नॉट एवरीथिंग इज बैड हियर। इनफैक्ट ऐसे भी केसेस हैं जिसमें आईटी ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। कार्तिक जिसका 2015 में 4.4 लाख सीटीसी से करियर शुरूहुआ वो आज 2025 में 1 करोड़ कमा रहा है। भोपाल का एक उबर ड्राइवर कोडिंग का एक कोर्स करके आईटी सेक्टर में घुस गया और अब अच्छी सैलरी कमा रहा है। मैं जब कस्टमर को पिक करने के लिए एयरपोर्ट पे जाता था और कस्टमर आकर के गाड़ी में बैठते थे तो मेरे को यह फील आता था कि एक दिन ऐसा जरूर आएगाकि मैं एयरपोर्ट से निकलूूंगा, कैब बुक करूंगा और गाड़ी में आकर के ऐसे बैठूंगा। बट सवाल यह है कि क्या आईटी सेक्टर अब भी वो एक ड्रीम फैक्ट्री है जहां मिडिल क्लास का सपना सच होता है या जो डार्क स्टोरीज हमने शुरू में देखी वो सिर्फ कुछ रेयर केसेस नहीं बल्कि एक सिस्टमैटिक टॉक्सिककल्चर का हिस्सा है जो अब जाके धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रहा है सोशल मीडिया की वजह से। आईटी इंडस्ट्री की हारश रियलिटी समझने से पहले आज के कॉर्पोरेट वर्ल्ड में सक्सेस पाने का एक सबसे बड़ा विलेन बन चुका है पुअर कम्युनिकेशन। आईटी, मार्केटिंग, फाइनेंस या एचआर चाहे आप किसीभी इंडस्ट्री में हो, आपके टेक्निकल स्किल्स से ज्यादा मायने रखते हैं आपके कम्युनिकेशन स्किल्स। क्योंकि इट्स लिटरली योर फर्स्ट इंप्रेशन। लेकिन अब सोचो आपने एक इंपॉर्टेंट क्लाइंट को या अपने बॉस को एक मेल भेजा और यह लिख दिया। रेस्पेक्टेड सर, आई एम राइटिंग दिस मेल टू इन्फॉर्म यूदैट माइसेल्फ विल नॉट बी अवेलेबल टुमारो। ऐसा सिर्फ एक ही मेल काफी है आपको एकदम अनप्रोफेशनल और नॉन सीरियस दिखाने के लिए। बट शॉकिंगली एक सर्वे के हिसाब से 62% इंडियंस एडमिट करते हैं कि उनसे प्रोफेशनल ईमेल्स में ग्रामेटिकल एरर्स अक्सर होते हैं। बट नॉट एनी मोर क्योंकि अब क्वल बॉटइसमें आपका एक सीक्रेट वेपन बन सकता है। क्विलबॉट एक एआई राइटिंग टूल है जो आपके गलत ग्रामर वीक बोरिंग सेंटेंसेस या इवन रॉन्ग टोन को स्मार्टली आइडेंटिफाई करके एकदम प्रोफेशनल बना देता है। जैसे हमारे गलत सेंटेंस को ही देख लो। क्वल बॉट ने कितना पॉलिश्ड और इंपैक्टफुल बना दिया।कुछ इसी तरह आप बड़े-बड़े पैराग्राफ्स को भी क्वलबॉट की मदद से विद इन सेकंड्स एकदम परफेक्ट बना सकते हो। एंड अपने हिसाब से अपनी राइटिंग का टोन भी सेट कर सकते हो। जैसे फॉर्मल, क्रिएटिव या फिर फ्लूएंट। इसका सबसे बेस्ट पार्ट आपको अलग से कुछ कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस करना नहीं पड़ता।क्वलbot Chrome एक्सटेंशन इंस्टॉल करो और बस Google DX Gmail या इवन Powpin प्रेजेंटेशंस में लिखते वक्त जैसे ही आप टेक्स्ट सेलेक्ट करके क्वलbot का ऑप्शन सेलेक्ट करोगे तुरंत आपको एक रिफाइंड और एरर फ्री वर्जन मिल जाता है। यानी अब से आपके प्रमोशंस या फिर क्लाइंट डील्स सिर्फवीक इंग्लिश की वजह से नजरअंदाज नहीं होंगे। तो सिर्फ एक मेल क्विलब से लिख के देखो। यू विल डेफिनेटली सी अ मेजर डिफरेंस। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। आप जाके ट्राई कर सकते हो। नाउ लेट्स कम बैक टू आवर टॉपिक। तो सबसे पहले यह बात समझो कि इंडियन आईटी इंडस्ट्री में दो टाइप्सके कंपनीज होती है। प्रोडक्ट बेस्ड कंपनीज़ जिनके खुद के प्रोडक्ट्स होते हैं जैसे कि Google, Amazon, Flipkart। लेकिन यह सिर्फ टॉप स्किल डेवलपर्स को ही हायर करते हैं। अब इंडिया की प्रॉब्लम यह है कि सिर्फ 2.68% फ्रेश इंजीनियर्स ही इस स्किल सेट को मैच कर पाते हैं। इसीलिए मेजॉरिटीइंजीनियर्स दूसरे टाइप ऑफ कंपनीज़ में ज्वॉइ करते हैं जो होती है सर्विस बेस्ड कंपनीज़ जैसे TCS, Infosys, WPRO वगैरह जो दूसरे ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए आईटी सर्विज प्रोवाइड करते हैं। इंडिया में 54 लाख से भी ज्यादा लोग इन्हीं सर्विस बेस्ड कंपनीज़ में काम कर रहे हैं। और एक्चुअलीइन्हीं कंपनीज़ की दुनिया भर में डिमांड भी काफी हाई है। क्योंकि इंडिया इन एमएसीस के लिए एक चीप लेबर हब है। एग्जांपल के लिए एक इंडियन आईटी एंप्लई को हायर करने के लिए एक अमेरिकन के कंपैरिजन में 70% सस्ता पड़ता है। सोचो कितना बड़ा प्रॉफिट मार्जिन है। बट एक आईटी ग्रेजुएट के लिएरियल स्ट्रगल तब शुरू होता है जब डिग्री के साथ उसे कॉलेज प्लेसमेंट तो मिल जाता है लेकिन फिर भी उसे अनइंप्लॉयड बनके रहना पड़ता है। ग्रेजुएट्स एंड पोस्ट ग्रेजुएट्स आर अनइंप्लॉयड रेडी टू वर्क फॉर ���ज लेस इज ₹4000 पर मंथ। मैंने बीटेक किया हुआ है वो भी कंप्यूटर साइंस से ही। कॉलेज प्लेसमेंट मिली थी।एमएनसी का एक्सपीरियंस हो चुका है मुझे 2.5 साल का। लगभग मैंने 100 प्लस या 150 प्लस कंपनीज़ में अप्लाई किया होगा। बट मुझे अभी तक एक भी कॉल नहीं आया है। महाराष्ट्र की सोनल जिसे कार्तिक कुमार की ही तरह डिग्री हाथ में आने से पहले ही प्लेसमेंट मिल गई थी। लेकिन 2 साल से वोInfosys के जॉइ लेटर का इंतजार ही कर रही है। बैंक वाले उसके घर तक पहुंच गए हैं। वो ऑफर लेटर दिखा के जैसे तैसे उन्हें टाल रही है। मगर ऐसा चलेगा कब तक? आज इंडिया के आईटी सेक्टर में कई फ्रेशर्स को ऑफर लेटर मिलने के बाद भी दो से तीन साल तक वेट करना पड़ रहा है। इसे आईटी इंडस्ट्रीमें ऑनबोर्डिंग बेंचिंग कहते हैं जो इसीलिए होता है क्योंकि यह सर्विस बेस्ड कंपनीज़ अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के एस्टीमेट्स पे ही हायरिंग करती है। सो अगर कल को प्रोजेक्ट डिले हुआ तो वो एंप्लाइजस का जॉइनिंग डेट भी डिले हो जाता है। एंड कई बार सालों तक। बट फाइनली जब एक फ्रेशर कोजॉब मिलती है, जानते हो इंडिया में उनकी एवरेज सैलरी कितनी है? 3 टू 5 लै पर एनम। पिछले 10 सालों में Infosys, TCS, विp्रो ने फ्रेशर्स की सैलरी 3 लाख के आसपास ही फ्रीज करके रखी हुई है। जो कि कई कॉलेजेस की 15 लाख की एडमिशन फीस के सामने कुछ भी नहीं है। आज की जॉब मार्केट में सबके लगे पड़े हैं।वो पुराने दिन चले गए जब मार्केट में पैसा था। लोगों ने भरभर के स्विच करा। 10 लाख वाले, 25 लाख पे पहुंच गए, 20 लाख, वाले, 40 लाख पे पहुंच गए। आज के टाइम में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। एस्पेशली यू आर अ फ्रेशर हु ट्राइंग टू लुक फॉर अ जॉब, योर कुक् अब एक बार जॉइनिंग कर लिया। इसके बाद शुरूहो जाता है स्ट्रगल ऑफ ओवरवर्क। कई कंपनीज में रोज के 14 से 16 घंटे काम करना एकदम नॉर्मल है। एक बेंगलुरु के आईटी एंप्लई ने बताया वो पिछले 2ाई साल से हर दिन 14 से 16 घंटे काम करने के बाद भी रात को 2:00 बजे सोता है। लेकिन इसके बाद भी उसे सुबह 9:00 बजे तक ऑफिस पहुंच जाना पड़ता है। औरहां, रात में भी नींद मिलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इट्स ओवर 12। मेरा बेटा यहां सो चुका है। अपने डैडी का वेट करते-करते किचन में खाना बना रखा है? क्योंकि मेरे हस्बैंड को खाने का टाइम नहीं मिला। क्या करूं? मेरे को समझ में नहीं आ रहा। आप बोल रहे हो मैं कर रहा हूं। मेरे को पता भी नहीं हम क्या करसुबह से अभी तक एंड आई डोंट नो कब तक चलने वाला है। एक दूसरे एंप्लॉय ने लिखा कि उसने चार दिन तक रात भर जाग कर एक फाइनेंस प्रोग्राम मॉनिटर किया। वो पूरे दिन में सिर्फ 4 घंटे ही सो पाता था और उसके शब्दों में यह प्योर टॉर्चर था। दूसरे आईटी सपोर्ट इंजीनियर को रात 1:30 बजेमैसेज आता है कि सुबह 6:00 बजे उसे शिफ्ट जॉइ करनी है। जबकि वो ऑलरेडी एक रात पहले देर रात तक काम कर चुका था। अब ओवरवर्क के बाद भी अगर फ्यूचर में आप लीडरशिप रोल्स चाहते हो तो इसके लिए अपना काम पूरा करके आपको एक्स्ट्रा रुकना पड़ता है। एक सीनियर डेवलपर ने बताया कि उसे हर हफ्ते ऑफिस केकाम के बाद 20 घंटे की कंपलसरी अनपेड लर्निंग करनी पड़ती है। सिर्फ इसीलिए ताकि वो लीडरशिप रोल के लिए क्वालिफाई हो जाए और इस वजह से अब उसे ए्जायटी और चेस्ट पेन होने लगा है। एंड ये सिर्फ इंडिविजुअल स्ट्रगल्स नहीं है। मै लेवल पे भी डाटा उतना ही डरावना है। इंडिया टुडे मेंपब्लिश्ड एक सर्वे में 1450 इंडियन आईटी प्रोफेशनल्स ने बताया 72% लोग हर हफ्ते लीगल 48 आवर्स शिफ्ट से भी ज्यादा काम करते हैं। 25% एंप्लाइजस तो हर हफ्ते 70 आवर्स से भी ज्यादा काम करते हैं। 83% टेकीस बर्न आउट फील कर रहे हैं और 68% पे आफ्टर ऑफिस भी ऑनलाइन रहने का प्रेशर होताहै। इसीलिए 2025 के अंत तक लगभग 22 लाख आईटी एम्प्लाइजस इस बर्न आउट की वजह से जॉब छोड़ने की प्लानिंग क�� रहे हैं। अब आई नो आप यही सोच रहे होंगे कि ऐसे में वो एचआर से कंप्लेन क्यों नहीं करते? बट इसका नतीजा क्या होता है जानते हो? एचआर आपसे मीटिंग लेके एक रिटन एपोलॉजी साइन करनेबोलता है क्योंकि आपने अपनी एक हारश रियलिटी सच्चाई सबके सामने रखने की हिम्मत की। एटलीस्ट कई फोरम्स पे आईटी एंप्लाइजस ने यही लिखा है। बट आप लोग के अपने-अपने कंपनीज़ के एचआर्स के बारे में क्या ओपिनियंस है? आप नीचे कमेंट सेक्शन में शेयर कर सकते हो। लेकिन चलो इतनी मेहनतकरने के बाद भी एक इंसान सोचेगा कि अब नहीं तो आगे जाके अच्छी सैलरी मिलेगी। बट यह है इंडियन आईटी सेक्टर की टॉप कंपनीज़ का हक स्ट्रक्चर। 2022 से इन कंपनीज़ का हक परसेंटेज गिरता ही जा रहा है। सैलरी हक् जैसे ऑलमोस्ट पॉज हो चुकी है। इस साल तो कंपनीज़ ऑन एन एवरेज सिर्फ 4 से 7% की हीहक् दे रही है। बट ये सिंगल डिजिट हक्स भी ऐसे ही आसानी से नहीं मिलती है। कई कंपनीज़ जैसे कि एलटीआई माइंड ट्री के प्रोजेक्ट लीड्स, मैनेजर्स और आर्किटेक्ट्स को हक मिलने के लिए कोडिंग और मैथ्स के कॉम्पिटेंट टेस्ट देने पड़ते हैं। फिर चाहे उनका पिछला टर्म या फिर साल का प्रैक्टिकलऑन ग्राउंड परफॉर्मेंस कितना भी अच्छा क्यों ना हो लेकिन उनका हक डिपेंड करेगा उनके इस टेस्ट के परफॉर्मेंस पे। TCS ने तो ये चार क्राइटेरिया रखा है जिन्हें एम्प्लाइजस को पूरा करना ही पड़ता है। कुछ रिपोर्ट्स के हिसाब से विp्रो में मोस्टली सिर्फ टॉप परफॉर्मर्स को ही हक्स मिलती हैऔर एचसीएल में ऐसी कोई कंडीशन मुझे नहीं मिली। लेकिन यहां के एंप्लाइजस को ऑन एन एवरेज ह वन या 5% ही मिलता है। कई टेक जंट्स के एम्प्लाइजस का यह भी कहना है कि चाहे हमारी परफॉर्मेंस रेटिंग कितनी भी पॉजिटिव हो फिर भी हक हमारा डिले होता ही है और कभी मिला भी तो सिर्फ दो-3000 का ही हक मिलता है।TCS, Infosys और बाकी जो भी कंपनीज़ है पिछले कई सालों से उन्होंने बहुत ज्यादा ऐसा कुछ सैलरी हक दिया नहीं है। Infosys में क्या हक हो रहा है? चार साल में 11% बढ़े हैं। पूरे चार साल में मिलाके। किसी साल मिले ही नहीं है। किसी साल 4%, किसी साल 3%. व्हाट्स द स्टार्टिंग सैलरी नाउ फॉर फ्रेशर्स?इटज़ बीन देअर द सेम सैलरी व्हाट वी हैव बीन गिविंग फॉर लास्ट सो मेनी इयर्स। व्हाई इज इट दैट फ्रेशर सैलरीज फॉर इंजीनियर्स नॉट गॉन अप इन द लास्ट सो मेनी इयर्स। 2024 के डाटा के मुताबिक सिर्फ 11.5% एम्प्लाइजस को प्रमोशन मिला। यानी 100 में से बस 11 लोगों को। विp्रो का यह एग्जांपलले लो। पिछले पूरे साल में सिर्फ 31 एंप्लाइजस को ही प्रमोशन मिली थी। बट ऑन द कॉन्ट्ररी बिज़नेस टुडे के हिसाब से पिछले 10 साल में Infosys WPRO और TCS के सीईओस की सैलरी 15500% से बड़ी है। लेकिन फ्रेशर्स की सिर्फ 50% फ्रेशर्स होते हैं उनकी सैलरी तीन या 4 लाख के आसपास ही रहती है। और जो सीईओसी हैउनकी लाखों करोड़ों में सैलरीज है। अब सैलरीज के अलावा इस इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है जॉब सेफ्टी। आईटी इंडस्ट्री में एक बड़ा सीक्रेट है जो जानते तो सब है मगर कोई खुल के एक्सेप्ट नहीं करता है। इसका नाम है द 404 सिंड्रोम। एक टॉप कंपनी के सीईओ शांतनु देश पांडे ने एक बहुत इंपॉर्टेंट बात कही।जो लोग अपने 40ज में होते हैं उनके ऊपर सबसे ज्यादा फाइनेंसियल बर्डन होता है। बच्चों की स्कूलिंग, पेरेंट्स की हेल्थ केयर और घर के एमाइस। लेकिन अनफॉर्चूनेटली अभी इसी एज ग्रुप के लोग आईटी में सबसे ज्यादा वनरेबल हो गए हैं टू ले ऑफ्स। कोरा रेडिट और बाकी कई जॉब फोरम्स ऐसे कमेंट सेभरे हुए हैं जिसमें लोगों ने लिखा है कि 40 के बाद तो आईटी में फ्यूचर ही नहीं है। उन्हें अपने ऑफिस में कोई 40 के ऊपर का एंप्लई ज्यादा दिखता ही नहीं है और डाटा भी इसी बात को सपोर्ट करता है। एनालिटिक्स इंडिया मैगजीन के सर्वे के हिसाब से Infosys और TCS जैसे टॉप फर्म्स के 50%एंप्लाइजस 20 से 35 इयर्स के एज ग्रुप में हैं। 40% लोग 35 से 50 के एज ग्रुप में है और सिर्फ 10% लोग ही 50 के ऊपर वाले हैं। यह डाटा दिखा रहा है कि आईटी सेक्टर में शायद अब रिटायरमेंट का एज 58 नहीं है बट 40ज और अर्ली 50ज में है। Infosys के खिलाफ तो यूएस में एज डिस्क्रिमिनेशन काकेस भी फाइल हो चुका है क्योंकि वो एजेड कैंडिडेट्स को हायर नहीं करते हैं। इसके पीछे परसेप्शन यह है कि ओल्डर एंप्लाइज स्लो अडप्ट करते हैं नए टूल्स और टेक्स्ट सीखने में और टाइम लगाते हैं बट उनका पैकेज काफी हाई होता है। जैसे-जैसे उनकी सन्योरिटी बढ़ती जाती है, वो 40 लै से ऊपरका पैकेज एक्सपेक्ट करते हैं। जो आईटी कंपनीज के लिए काफी बड़ा ओवरहेड कॉस्ट होता है और इसीलिए द प्रिंट ने इसे द 40-4 सिंड्रोम नाम दिया है। और अब तो मार्केट में एआई आ गया है। पहले तो लोगों को लगता था कि अगर जॉब चली गई है तो शायद परफॉर्मेंस खराब होगा या एज फैक्टर होगा।लेकिन अब तो कंपनीज़ ओपनली कह रही है कि हम एआई की वजह से लोगों को रिप्लेस कर रहे हैं। रिसेंटली Microsoft ने अपनी 2% वर्क फोर्स को फायर कर दिया। अराउंड 50,000 लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए। रीजन क्योंकि कंपनी को एi टेक में ट्रांजिशन करना है। इतना ही नहीं Microsoft ने एआई डिवीजन केडायरेक्टर को भी तक निकाल दिया। Microsoft अनाउंस्ड अनदर राउंड ऑफ़ मैसिव लेऑफ। द टेक कंपनी इज लेइंग ऑफ अबाउट 9000 एम्प्लाइज। Microsoft इज नॉट अलोन। Google, Amazon, मेटा दे हैव ऑल गॉन थ्रू राउंड्स ऑफ़ लेऑफ्स। वन रीज़न कीप्स शोइंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। 60% ऑफ़ ऑल जॉब्स चेंज्ड बिटवीन 1940 एंडटुडे। आई डु बिलीव दैट एआई इज गोइंग टू रिप्लेस अ लॉट ऑफ़ व्हाट आई ऍम कॉलिंग वाइट कॉलर क्लेरिकल जॉब्स। पर इसमें एक बात गौर करने वाली ये है कि मोस्टली सीनियर और मिड लेवल एम्प्लाइजस को फायर किया जा रहा है। ऑब्वियसली सैलरीज बचाने के लिए। फिर टीसीएस ने भी लगभग 12,000 लोगों को हटा दिया। वो भी मोस्टलीमिड और सीनियर लेवल एंप्लाइजस ही थे। कंपनी ने रीज़न दिया कि उन सबका स्किल सेट मैच नहीं करता। सो शायद यहां भी वो एआई लेड प्रोजेक्ट्स के लिए स्किल्स की बात कर रहे थे। मतलब इन आईटी कंपनीज़ में जो लोग नए टूल्स और टेक के साथ अपस्किल नहीं हो पा रहे हैं उन्हें सबसे पहले टारगेट कियाजा रहा है। अब देखो कंपनीज़ एआई के नाम पे मोस्टली दो तरह की जॉब्स हटा रही है। सबसे पहला तो मिड लेवल मैनेजर्स का। क्योंकि पहले मैनेजर्स के तीन मेजर काम होते थे। फर्स्ट कोऑर्डिनेशन का काम जैसे टास्क असाइन करना, डेडलाइंस को ट्रैक करना वगैरह। लेकिन आज आसना, ट्रेलो, mi.comजैसे एi टूल्स ये सब काम रियल टाइम में कर रहे हैं। वो भी बिना ह्यूमन एरर के। दूसरा रिपोर्टिंग वाला काम। पहले मैनेजर रिपोर्ट्स बनाते थे और डाटा एनालाइज करते थे। लेकिन आज पावर, बीआई, टैबलो जैसे टूल्स खुद से डाटा एनालाइज करके डैशबोर्ड्स बनाते हैं। इंसाइट्स निकालते हैं वो भी चुटकियों में। तीसरा डिसीजनमेकिंग वाले काम। डेली ऑपरेशंस और क्राइसिस सॉल्व करना मैनेजर का काम था। लेकिन अब प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और एमएल एल्गोरिदम्स मतलब कुछ स्पेशल एआई टूल्स बस प्रोजेक्ट के डिटेल्स देने पर ही पहले से बता देते हैं ट्रेंड्स एनालाइज करके कि कौन सी प्रॉब्लम आ सकती है और उसके सशंसक्या हो सकते हैं। अब मिड लेवल मैनेजर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंपैक्ट हो रहा है डेवलपर्स पे। कॉर्नर यूनिवर्सिटी के एक एक्सपेरिमेंट में एक डेवलपर और एक एआई गेट हब को पायलट के बीच में कोडिंग स्पीड की रेस हुई एंड द रिजल्ट्स विल ब्लो योर माइंड। कोपायलट ने ह्यूमन से 55.8%फास्ट कोड लिखा। यानी अब एक डेवलपर की जगह आधे से भी कम टाइम में एi वही काम कर रहा है। सत्यनंदला ने खुद कहा है कि Microsoft की 30% कोडिंग आज एi टूल्स से होती है और आयरनी यह है कि Microsoft ने उन डेवलपर्स को भी निकाल दिया है जिन्होंने एi टूल्स बनाने में मदद की थी। और एi की कॉस्टएफिशिएंसी तो कंपनीज के लिए एक जैकपॉट बन चुकी है। एक ग्लोबल थिंक टैंक मीटर ने टेस्ट करके बताया कि एi सिर्फ $2 या उससे कम कॉस्ट में भी बग्स फिक्स कर सकता है वो भी मिटो में। सो मैथ्स यहां यह है कि जब एक काम $2 में हो सकता है तो एक कंपनी $ लाख पर मंथ क्यों देगी? एंड एआई के अलावाएक और एक चीज है जो आईटी एम्प्लाइजस को कास्टेंटली आउटपेस कर रही है। तेज रफ्तार से बदलती प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। देखो आईटी सेक्टर में कोई भी ऐप या वेबसाइट बनाने के लिए डेवलपर्स अलग-अलग कोडिंग लैंग्वेज यूज करते हैं। जैसे जावा, Python, Swift वगैरह। लेकिन प्रॉब्लम यहहै कि ये लैंग्वेजेज़ अब हर कुछ सालों में ही ऑब्सोलेट हो जा रही हैं। 2017 के पहले Android एप्स मोस्टली जावा में बनती थी। लेकिन आज कॉटलिंग लैंग्वेज ने उसे रिप्लेस कर दिया है। मेटा, ओलx, Amazon जैसे जॉइंट्स ने अपना पूरा कोड कॉटलिन में ही रीाइट कर दिया है। Apple ने भी 2014 केबाद ऑब्जेक्टिव सी लैंग्वेज को ऑलमोस्ट रिटायर करके Swift को मैंडेटरी कर दिया। वेब डेवलपमेंट में भी पहले पर्ल यूज़ होती थी। अब Python, जावास्क्रिप्ट और रस्ट डिमांड में है। बेसिकली हर दो-तीन सालों में नए फ्रेमवर्क्स और लैंग्वेजेस आ जाते हैं। इतनी स्पीड से नए लैंग्वेज अपडेट होरहे हैं कि कई मिड लेवल डेवलपर्स को एडप्ट करने के टाइम मिले बिना ही उनका स्किल सेट इररेिलेवेंट होते जा रहा है। व्हेन यू लर्न अ कंसेप्ट ऑफ अ कोडिंग लैंग्वेज, लाइब्रेरी और एपीआई, देयर इज ऑलवेज पॉसिबिलिटी दैट इट विल बिकम ओल्ड एंड ऑब्सोल्यूट इन नेक्स्ट फ्यू इयर्स। और इन सबके अलावा एक और एक बड़ा फैक्टर हैसरकारी पॉलिसीज। 2020 के बाद से गवर्नमेंट ने कई आईटी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन यानी कि सेल्स के टैक्स बेनिफिट्स हटा दिए और वर्क फ्रॉम होम के लिए नए स्ट्रिक्ट रूल्स ला दिए। अब कंपनीज़ को फुल टैक्स देना पड़ता है और रिमोट वर्क के बावजूद 50% स्टाफ को ऑफिस बुलाना पड़ता है। अगेन एक और एक बेनिफिट जोपहले आईटी एम्प्लाइजस को मिलता था। अब धीरे-धीरे वो भी घटता जा रहा है। कंपनीज़ ने पहले वन डे वर्क फ्रॉम ऑफिस से स्टार्ट किया। लेकिन अब धीरे-धीरे टू थ्री से वो कंप्लीटली वर्क फ्रॉम ऑफिस कल्चर में शिफ्ट होने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अब इसका अंजाम यह हो रहा है कि कंपनीज़ के लिएकॉस्ट बढ़ रही है बट प्रॉफिट्स घट रहे हैं। सो इसका सशन बन रहा है मास फायरिंग। सो ये थे सभी रीज़ंस बिहाइंड स्ट्रेसफुल एंड टॉक्सिक वर्क कल्चर एंड आईटी। बट मुझे पर्सनली इस सेक्टर की सबसे बड़ी एंड कोर प्रॉब्लम पता है क्या लग रही है? डिमांड से कहीं ज्यादा लेवल का सप्लाई। आपने ऐसीन्यूज़ सुनी होगी। पुणे में 100 जॉब्स के लिए 3000 इंजीनियर्स लाइन में खड़े हैं। गुजरात में सिर्फ 10 वैकेंसीज के लिए 1000 लोग इंटरव्यू देने आ गए हैं। इंडस्ट्री की सिचुएशन इतनी खराब है कि पिछले साल 15 लाख इंजीनियर्स ग्रेजुएट हुए लेकिन सिर्फ 70,000 फ्रेशर्स को ही जॉब मिली। मतलब जितनी वैकेंसीज भी नहीं हैउससे भी ज्यादा लोग हजारों लोग काम के लिए रेडी बैठे हैं। इसका फायदा जाहिर है कंपनीज उठा रही है। वो एम्प्लाइजस को चाहे जैसे भी ट्रीट करें एंप्लाइज उसे चुपचाप सह लेते हैं। क्योंकि दोनों जानते हैं कि बाहर हजारों लोग उन्हें रिप्लेस करने के लिए बस इंतजार कर रहे हैं। नाउ द क्वेश्चनइज हाउ टू एस्केप दिस लूप? क्या इसका मतलब यह है कि आईटी सेक्टर बिल्कुल खत्म हो चुका है। किसी को उसे जॉइ नहीं करना चाहिए? बिल्कुल नहीं। मैं कई लोगों को जानती हूं जो आईटी में है एंड हु आर हैप्पी विद देयर सैलरी एंड कंपनसेशन। लेकिन हां वर्क कल्चर और टाइमिंग्स को लेकर मेरे भी फ्रेंड्स उतने खुश नहीं है।लेकिन इस वीडियो से एक बात सबको समझ जानी चाहिए कि आईटी इज नो लगर अ सेफ ज़ोन। इनफैक्ट इट हैज़ बिकम अ वॉर ज़ोन। और बैटल फील्ड में सिर्फ वही टिकता है जो कास्टेंटली खुद को अपग्रेड करता है। जैसे नारायण मूर्ति ने भी कहा था लर्न, अनलर्न एंड देन रीलर्न। दैट इज द ओनली वे टूसर्वाइव दिस इंडस्ट्री। आज भी कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने टाइम पर अपस्किल किया और ऐसे फ्यूचर प्रूफ स्किल्स सीखे जिन्होंने उन्हें इरिप्लेसेसबल बना दिया। जैसे किसी ने क्लाउड सीखा, किसी ने डाटा इंजीनियरिंग और किसी ने एआई टूल्स और आज वो या तो फॉरेन कंपनीज़ के लिए रिमोट काम कर रहे हैंया खुद का फ्रीलांसिंग क्लाइंट्स हैंडल कर रहे हैं ऑन देयर ओन टर्म्स। जैसे ये 32 साल के इंजीनियर जिन्होंने 2015 में एक टायर टू कॉलेज से इंजीनियरिंग की और एज अ सॉफ्टवेयर डेवलपर 4.4 लैक्स के पैकेज से उनकी शुरुआत हुई। लेकिन फिर 2019 में उन्होंने अपस्किल किया और उन्हें सीधा ₹17लाख का पैकेज मिल गया और आज ऐसे ही अपस्किल करते-करते वो ₹1 करोड़ कमा रहे हैं। कहने का मतलब है इंडस्ट्री टॉक्सिक हो सकती है लेकिन हर एक एंप्लॉय की कहानी वो खुद लिखता है। तो अब सवाल यह नहीं है कि आईटी इंडस्ट्री आपके साथ क्या करेगी? सवाल यह है कि आप आईटी इंडस्ट्री में बनेरहने के लिए क्या करने वाले हैं? या फिर इस पूरे लूप से ही बाहर निकलने के लिए आप क्या करने वाले हो? अगेन मेरे कुछ फ्रेंड्स हैं जिन्होंने आईटी फील्ड से बाहर निकलकर अपना खुद का स्माल स्किल बिजनेस स्टार्ट कर लिया या फिर किसी ने फील्ड ही चेंज कर लिया। बट अगेन मेरा यह वीडियो किसी को भी डराने के लिए नहीं है।यह बस एक रियलिटी चेक है कि सिर्फ आईटी इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा रफ्तार से बदल रही है। शायद पूरी हिस्ट्री में टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से कभी इवॉल्व नहीं हुई होगी। मगर परिवर्तन ही तो प्रकृति का नियम है। और इसीलिए आज का मैसेज एकदम सिंपल है। इटइज नॉट द स्ट्रांगेस्ट ऑफ द स्पीशीज दैट सर्वाइव्स नॉर द मोस्ट इंटेलिजेंट बट इट इज द वन दैट इज द मोस्ट एडप्टेबल टू चेंज। जय हिंद। एंड हां, जाने से पहले डू नॉट फॉरगेट टू चेक आउट क्वब जो आपके सारे ईमेल्स, प्रेजेंटेशंस, असाइनमेंट्स, सारी चीजों में आपके इंग्लिश ग्रामर को बहुत ज्यादाइंप्रूव कर सकता है। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन।

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